'संपत्ति की घोषणा करें अन्यथा जेल जाने को तैयार रहें'

बयान के मुताबिक, "झारखण्ड के राज्यपाल एम. ओ. एच. फारुक ने एक आदेश पारित किया है जिसमें कहा गया है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों को प्रत्येक तीन साल में अपनी संपत्ति की घोषणा करनी होगी। यदि कर्मचारी ऐसा करने में अयोग्य साबित होता है तो उसे एक साल कैद की सजा भुगतना पड़ सकता है।"

बयान में कहा गया है, "नव नियुक्त कर्मचारियों को नियुक्ति के तीन महीने के भीतर संपत्ति की घोषणा करनी होगी।"

राज्य में जारी किए गए नए सर्कुलर में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को छूट दी गई है। उनके अलावा राज्य के 1,200 अधिकारियों सहित लगभग 60,000 कर्मचारियों पर यह नियम लागू होगा।

इससे पहले भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस)के अधिकारियों को प्रत्येक वर्ष संपत्ति की घोषणा करने के लिए कहा गया था, लेकिन 80 फीसदी से अधिक अधिकारियों ने अपनी संपत्तियों की घोषणा नहीं की थी।

नए सर्कुलर के मुताबिक राज्य के प्रत्येक कर्मचारियों के लिए संपत्ति की घोषणा करना अनिवार्य हो गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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