वैश्विक शहरों की सूची में पीछे छूटे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता
वाशिंगटन, 17 अगस्त (आईएएनएस)। एक ओर जहां संस्कृति और बाजार का प्रभाव राष्ट्रों से शहरों और पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे शहर वैश्विक शहरों का दर्जा हासिल करने में काफी पीछे हैं।
एक पत्रिका 'फॉरेन पॉलिसी' ने प्रबंधन परामर्श कंपनी ए टी कीर्ने और 'शिकागो काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स' के साथ संयुक्त रूप से रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक, "इक्कीसवीं सदी में अमेरिका या चीन, ब्राजील या भारत नहीं बल्कि शहरों का वर्चस्व होगा।"
केवल शहरों का बड़ा होना ही उन्हें वैश्विक शहर नहीं बना सकेगा। दस लाख से अधिक की आबादी होने के बावजूद 65 शीर्ष वैश्विक शहरों की सूची में कराची (60), लागोस (59) और कोलकाता (63) जैसे शहर काफी पीछे हैं। इस सूची में दिल्ली 45वें व मुंबई 46वें स्थान पर है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "हम एक वैश्विक मोड़ पर हैं। अब दुनिया की आबादी का आधा हिस्सा शहरी है और दुनिया के वैश्विक शहरों में से आधे शहर एशिया में हैं।"
वर्ष 2010 के 10 प्रमुख वैश्विक शहरों में से पांच शहर एशिया-प्रशांत से हैं। ये शहर टोक्यो, हांगकांग, सिंगापुर, सिडनी और सियोल हैं। तीन अमेरिकी शहर न्यूयार्क, शिकागो और लास एंजेलिस हैं। सूची में केवल दो शहर लंदन और पेरिस ही यूरोपीय शहर हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक राजनीतिक शहरों का वैश्विक शहर होना जरूरी नहीं है। दस प्रमुख वैश्विक शहरों की सूची में केवल चार ही राष्ट्रीय राजधानियां हैं। वाशिंगटन 13वें, बीजिंग 15वें, बर्लिन 16वें और मास्को 25वें स्थान पर है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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