पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष को अंतरिम जमानत
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहलों को अंतरिम जमानत (गिरफ्तारी से उन्मुक्ति) देने के साथ ही उनको पटियाला की सीबीआई की विशेष अदालत में पेश होने का निर्देश दिया था। सीबीआई अदालत ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर उनको अंतरित जमानत दी।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि यदि कहलों को जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया जाए तो उनको सीबीआई अदालत से जमानत मिलनी चाहिए। उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 26 अगस्त की तारीख तय की है।
भर्ती के लिए घूसखोरी के तीन अन्य आरोपी भी मंगलवार को सीबीआई की विशेष अदालत के सामने पेश हुए।
कहलों के अलावा जिन अधिकारियों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है उनमें तत्कालीन वित्त आयुक्त एवं प्रमुख सचिव जे.एस.केसर और तत्कालीन ग्रामीण विकास निदेशक मानदीप सिंह शामिल हैं। केसर और मानदीप सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी हैं। कुछ समय पहले केसर सेवानिवृत्त हो गए।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 1997-2002 के बीच 909 पंचायत सचिवों की नियुक्ति में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी पद का दुरुपयोग करने के आरोप में इस वर्ष जुलाई महीने में कहलों सहित 15 लोगों के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत में एक आरोप पत्र दाखिल किया था।
जिस समय पंचायत सचिवों की नियुक्ति की गई थी, उस समय (1977-2002) कहलों पंजाब सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री थे।
कहलों सहित सभी 15 आरोपियों को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोपी बनाया गया है।
निचली अदालत द्वारा 17 अगस्त को पटियाला शहर में पेश होने के लिए नोटिस जारी किए जाने के बाद कहलों ने निचली अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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