24 वर्षो बाद भ्रष्टाचार के आरोपों से बरी हुआ बैंक अधिकारी
मुंबई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। वर्ष 1986 से भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहे बैंक कार्यकारी एम.यू. किणी ने अंतत: 24 वर्ष की लड़ाई के बाद जंग जीत ली है। यह अलग बात है कि इस दौरान उन्हें अपनी पत्नी से हाथ धोना पड़ा और करियर मिट्टी में मिल गया।
किणी (78) 1986 से 1989 तक भारतीय युनियन बैंक (यूबीआई) के कार्यकारी निदेशक रहे। किणी को सबसे बड़ा पछताव यह है कि उनकी इस जीत में साझेदार बनने के लिए उनकी पत्नी राजरमानी आज जीवित नहीं है। उनकी पत्नी कैंसर के कारण चार वर्ष पहले दुनिया छोड़ कर चली गई।
यूबीआई के कार्यकारी निदेश का पदभार संभालने के थोड़े समय बाद ही किणी पर तत्कालीन अध्यक्ष जे.एस.भटनागर द्वारा आंतरिक नोटिस जारी किया गया। उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने कुछ करोड़ों रुपये के अनुचित लेने-देन किए।
किणी ने आईएएनएस को बताया, "मैंने उन सभी मेमो का जवाब दिया था, स्थिति के बारे में स्पष्टीकरण दिया था और मामला वहीं समाप्त हो गया था। अचानक एक दिन नियमों की अवहेलना करते हुए बैंक ने इस मामले को सीधे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया।"
सीबीआई ने निर्दयतापूर्वक मामले में हस्तेक्षप किया और पूछताछ के लिए किणी को नियमित रूप से तलब किया और उन्हें कार्यकारी निदेशक की जिम्मेदारियों से दूर कर दिया गया।
इस बीच दिसंबर 1988 में भटनागर सेवानिवृत्त हो गए। ऐसे में किणी के लिए अगले अध्यक्ष का रास्ता साफ हो गया।
किणी ने बैंकिंग उद्योग में ऊपर चलने वाले राजनीतिक मजाक को याद करते हुए कहा, "भटनागर और उनके कुनबे के लिए हमला करने के लिए यह रणनीतिक समय था। अध्यक्ष की नियुक्ति की मेरी फाइल मंजूरी के लिए केंद्र के पास लंबित थी, इसी बीच सीबीआई ने कफ परेड स्थित मेरे घर पर छापा मारा। यह छापा मेरे खिलाफ मामला दर्ज होने के लगभग तीन सालों बाद मारा गया था और कार्यकारी निदेशक का मेरा कार्यकाल समाप्त होने में मात्र चार दिन बाकी बचे थे।"
किणी ने कहा, "शुरू में तो मैंने ये सारे थपेड़े झेल लिए, क्योंकि मेरे पास खुद को बेगुनाह साबित करने का एक जज्बा था। लेकिन 60 और 70 की उम्र में मेरे लिए यह एक थकाऊ मामला बन गया। यह एक तरह से किसी बेगुनाह व्यक्ति के लिए सजा के समान था और मुझे खूंखार अपराधियों के बीच लंबे समय तक बेंचों पर बैठे रहना पड़ता था।"
अंतत: इस वर्ष अप्रैल महीने में विशेष सीबीआई अदालत के विशेष न्यायाधीश विजय आर.सिकची ने किणी पर लगाए गए सभी आरोपों को समाप्त कर दिया। किणी के साथ ही छह अन्य आरोपियों को भी बरी कर दिया गया।
भविष्य की योजना के बारे में पूछे जाने पर किणी ने कहा, "मेरी योजना में यहां स्थित अपने निजी फ्लैट को बेच कर अपने गृह नगर चेन्नई जाने की है। मैं कुछ उन समाजसेवी संस्थाओं के साथ खुद को व्यस्त करूंगा, जिनके साथ मैं पिछले छह दशकों से काम कर रहा हूं। यही मेरा अंतिम कदम है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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