घाटी में कर्फ़्यू के बावजूद प्रदर्शन, दो मारे गए

बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारत प्रशासित कश्मीर में शुक्रवार के प्रदर्शनों में हुई चार मौतों के बाद, शनिवार को लगभग पूरी घाटी में कर्फ़्यू के बावजूद अनेक जगहों पर लोगों ने कर्फ़्यू का उल्लंघन कर विरोध प्रदर्शन किए. कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुई और दो लोग मारे गए.
घाटी के दक्षिणी शहर अनंतनाग में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस फ़ायरिंग में एक व्यक्ति मारा गया और पाँच घायल हुए. दूसरी ओर उत्तरी शहर नारबल में भी सीआरपीएफ़ की फ़ायरिंग में एक प्रदर्शनकारी की मौत हो गई.
सोपोर में सिलू में भी प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने गोलियाँ चलाई जिसमें चार लोग घायल हो गए. पुलिस अधिकारियों के अनुसार सोपोर में प्रदर्शनकारियों ने सेना के एक कैंप की घेराबंदी करने का प्रयास किया था, इसलिए पुलिस ने फ़ायरिंग की थी.
उधर बोमई में भी प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस कैंप की घेराबंदी का प्रयास किया. पुलिस अधिकारियों का दावा है कि सोपोर और बोमई में प्रदर्शनकारियों के बीच से किसी ने पुलिस पर फ़ायरिंग की थी और इसके जवाब में पुलिस ने गोलीबारी की है.
दूसरी ओर हज़रतबल में नमाज़ के बाद प्रदर्शन शुरु हुए और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठियाँ बरसाईं. ख़बर है कि हज़रतबल में मस्जिद के शीशे भी इसी टकराव के बीच टूट गए हैं. इस तरह घाटी में जून से शुरु हुए प्रदर्शनों में अब तक 57 लोग मारे गए हैं. श्रीनगर के अलावा उत्तरी कश्मीर में सोपोर, पटन, कुपवाड़ा, हंदवाड़ा और त्रेगाम में कर्फ़्यू लागू है. जबकि दक्षिणी कश्मीर में अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और कायमू में कर्फ़्यू जारी है.
सोपोर, बांदीपुर और खनबल में प्रदर्शन हुए और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आँसूगैस के गोले छोड़े. पटन के सिंगपुरा में सीआरपीएफ़ ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया. अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने सीआरपीएफ़ के वाहन पर पथराव किया उसके बाद गोलियाँ चलाई गईं.
श्रीनगर के कमरवाड़ी से भी प्रदर्शन की ख़बरें मिली हैं. जम्मू कश्मीर में तैनात सेना, पुलिस और सभी सुरक्षा बलों के संयुक्त कमान की बैठक शुक्रवार शाम के लिए बुलाई गई थी और इसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को करनी थी. लेकिन यह बैठक रद्द कर दी गई.
गोलीबारी और चार मौतों से मुख्यमंत्री अब्दुल्ला नाराज़ थे और सूत्रों का कहना है कि वे चाहते हैं कि सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों को क़ाबू में रखने के लिए संयम से काम लें और अगर गोली चलानी भी हो तो यह ध्यान में रखा जाए कि गोली से किसी की मौत न हो. सरकारी वक्तव्य में कहा गया कि चूंकि सुरक्षा अधिकारी क़ानून व्यवस्था क़ायम करने में लगे हुए थे इसलिए बैठक रद्द की गई और अब यह बैठक शनिवार को होगी.












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