मौलिक मूल्यों में भारत चीन से आगे : दलाई लामा

मैक्लियॉडगंज, 14 अगस्त (आईएएनएस)। तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि चीन आर्थिक क्षेत्र में भारत से आगे हो सकता है लेकिन वह स्वतंत्रता, पारदर्शिता और कानून के शासन के क्षेत्र में पिछड़ा है।

अपना उत्तराधिकारी घोषित करने की भी उनको कोई जल्दबाजी नहीं है क्योंकि उनको अभी अपने जीवन के कई दशक बचे होने की उम्मीद है।

अपने आवास पर आईएएनएस को दिए गए एक साक्षात्कार में दलाई लामा ने कहा, "जैसा भारतीय प्रधानमंत्री ने कहा, चीन आर्थिक क्षेत्र में भारत से आगे हो सकता है लेकिन वहां कानून के शासन, पारदर्शिता, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता जैसे मूल्यों की कमी है।"

उन्होंने कहा, "अमेरिका और मुक्त दुनिया मौलिक मूल्यों को बहुत अधिक महत्व देते हैं और उसका पालन करते हैं। व्यक्तिगत स्वतंत्रता नई खोजों का रास्ता तैयार करती है। "

दलाई लामा ने कहा कि हाल के दशकों में चीन की आर्थिक वृद्धि बाहरी धन और सस्ते श्रमिकों के शोषण पर आधारित है। निश्चय ही हाल में वहां कुछ नई खोजों की खबरें आईं हैं। यह अच्छा है लेकिन राजनीतिक रूप से अभी तक वहां सब कुछ नियंत्रित है।

उन्होंने कहा, "मुक्त दुनिया की ताकत केवल पैसे ही नहीं वरन अन्य चीजों पर भी निर्भर है। चीन में यह केवल पैसे की ताकत है।"

उन्होंने कहा कि लंबे समय में चीन के बुद्धिजीवियों और कुछ नेताओं ने महसूस किया कि वहां एक कमजोरी है और वे बदलाव चाहते हैं। वे आर्थिक और राजनीतिक दोनों क्षेत्रों का आधुनिकीकरण चाहते हैं। चीन में यह बदलाव की बयार है।

दलाई लामा ने कहा कि जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक सकारात्मक कदम है। इससे चीन को तिब्बत जैसे मुद्दों को सुलझाने का आत्म-विश्वास मिलेगा।

दलाई लामा ने कहा कि यदि चीन का आत्म-विश्वास बढ़ेगा तो वह घरेलू समस्याओं से अधिक बेहतर ढंग से निपट सकेगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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