पाकिस्तान बाढ़ : स्वतंत्रता दिवस के कई कार्यक्रम रद्द (लीड-1)

पाकिस्तानी नागरिक 1947 से प्रत्येक वर्ष 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं, क्योंकि विभाजन के बाद इसी दिन अलग देश बना था। वाहनों और भवनों के शीर्ष पर झंडे लहराते रहते हैं उन पर फूल-मालाएं चढ़ाए जाते हैं। लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल उलट है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान इन दिनों भयावह बाढ़ का सामना कर रहा है। बाढ़ से 1,600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। अनुमान है कि बाढ़ से पाकिस्तान को 2.92 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।

सभी सरकारी आयोजन रद्द कर दिए गए तथा पाकिस्तानी राष्ट्रपति के सरकारी आवास 'ऐवान-ए-सद्र' पर भी कोई कार्यक्रम नहीं रखा गया।

राष्ट्रपति कार्यालय से जारी बयान के अनुसार राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी इस दिन बाढ़ प्रभावित पंजाब, खबर पख्तूनख्वा प्रांतों का दौरा कर रहे हैं।

सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारियों ने बताया कि सरकारी अधिकारी भी कार्यक्रम आयोजित करने और समारोहों में भाग लेने के इच्छुक नहीं हैं, क्योंकि वे बाढ़ प्रभावित इलाकों के दौरे पर हैं।

पाकिस्तानी सेना ने भी स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रमों को रद्द कर दिया। दान में दिया जा रहा धन स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों पर खर्च करने के बजाय बाढ़ पीड़ितों को दिया जाएगा। सेना आगामी छह सितंबर को रक्षा दिवस भी नहीं मनाएगी।

शनिवार को इस मौके पर राष्ट्र के नाम संदेश में गिलानी ने देश में बाढ़ की विभीषिका के कारण सैकड़ों लोगों की जान जाने पर गहरा दुख जताया।

उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ प्रभावित दो करोड़ लोगों के पुनर्वास की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खबर-पख्तूनख्वा सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। वहां हजारों घर ढह गए, सपर्क मार्ग और पुल ध्वस्त हो गए तथा अरबों रुपये मूल्य की खड़ी फसलें बह गईं।

उन्होंने कहा कि भविष्य में इसका परिणाम अभावों के रूप में सामने आएगा इसलिए समाज, गैर सरकारी संगठन और जनता सरकार के हाथ मजबूत करें, ताकि प्रलय से उबरा जा सके।

समाचार चैनल 'जियो न्यूज' के अनुसार गिलानी ने कहा, "मैंने संकट से उबरने के लिए मदद के लिए विश्व समुदाय से हाथ बढ़ाने की अपील की है। इसलिए पाकिस्तान आतंकवाद की धमकियों के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है।"

गिलानी ने कहा कि प्राकृतिक चुनौतियों के बावजूद पाकिस्तान सरकार और यहां के लोग अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

उन्होंने कहा, "हम 64वां स्वतंत्रता दिवस उस वक्त मना रहे हैं जब देश कई चुनौतियों से जूझ रहा है। सबसे अहम है बाढ़ पीड़ितों का पुनर्वास, आतंकवाद से लड़ना, अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए संघर्ष और राजनीतिक स्थिरता।"

गिलानी ने कहा, "हमारी राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई और प्राकृतिक आपदा दोनों ने क्षति पहुंचाई है।"

चैनल के मुताबिक कराची में एक राजनीतिक दल के कार्यकर्ता ने कहा, "बाढ़ की त्रासदी की वजह से हम स्वतंत्रता दिवस और ईद के मौके पर कोई जश्न नहीं मनाएंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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