पतंगबाजी : नहीं रहा पहले सा उत्साह
नई दिल्ली, 14 अगस्त (आईएएनएस)। स्वतंत्रता दिवस पर पतंग उड़ाने का चलन बहुत पुराना है। देश की राजधानी दिल्ली में मॉल से लेकर चौराहों तक बाजार पूरी तरह से पतंगों से पटे हुए हैं। आजादी की वर्षगांठ के इस मौके पर पंतग बनाने का करोबार करने वालों का कहना है कि 60 और 70 के दशक में लोग जिस जोश और उत्साह से पतंगबाजी का आनंद लेते थे वैसा अब देखने को नहीं मिलता।
दिल्ली के करोल बाग, पीतमपुरा, मंगोलपुरी और अन्य मुख्य जगहों पर तिरंगे झंडे तथा अन्य रंगों की पतंगें बिक रही हैं। दुकानदारों की मानें तो बच्चे ही पतंगों की खरीददारी में दिलचस्पी दिखाते हैं। दुकानों पर कागज और प्लास्टिक दोनों तरह की पतंगे बिक रही हैं।
पीतमपुरा में रहने वाले एक व्यवसाई मदन लोहिया ने आईएएनएस को बताया, "स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बच्चों के अंदर तो पतंग उड़ाने का जोश होता है लेकिन बुजुर्गो और युवाओं में पहले जैसा जोश और उत्साह नहीं दिखाई देता। पहले लोग एक सप्ताह पहले ही खास रंगों वाली पतंगें बनाने का आर्डर देते थे लेकिन अब वैसा उत्साह देखने को नहीं मिलता।"
अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए लोहिया कहते हैं, "मैं जब छोटा था उस समय आज की अपेक्षा अधिक पतंगबाजी हुआ करती थी। अपने पिताजी के साथ हम लोग घंटों पतंग उड़ाया करते थे। स्वतंत्रता दिवस के दिन छतों पर लोगों का हुजूम रहता था। उस दिन आसमान पतंगों से पट जाता था।"
करोल बाग में एक दुकानदार हरीश गोस्वामी ने बताया, "स्वतंत्रता दिवस से एक सप्ताह पहले पतंगों का कारोबार काफी मंदा चलता है लेकिन 15 अगस्त के दिन पतंग की बिक्री बढ़ने का अनुमान है। लोग स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगे झंडे के आकार वाली ही पतंग की मांग करते हैं। खरीददारों में छोटे बच्चों की संख्या अधिक होती हैं।"
गोस्वामी ने बताया कि पतंग की कीमत भी पहले से कहीं अधिक हो गई है। पहले के समय में 25 से 50 पैसे में पतंग मिला करती थी और अच्छी पतंग के लिए लोगों को अधिक से अधिक पांच रुपये तक खर्च करना पड़ता था, लेकिन आज सबसे सस्ती पतंग की कीमत भी पांच रुपये के आस-पास है और अच्छी पतंग खरीदने में 50 रुपये से अधिक लग जाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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