दिल्ली के स्कूली छात्रों ने खोजा नया क्षुद्र ग्रह
रेयान इंटरनेशनल स्कूल के कक्षा 12वीं के छात्र अमनजोत सिंह और साहिल वाधवा ने छह अगस्त को ऑल इंडिया एस्ट्रॉएड सर्च कैम्पेन (एआईएएससी) के तहत मुख्य बेल्ट के एक क्षुद्रग्रह (2010 पीओ24) को खोज निकाला।
क्षुद्रग्रह आम ग्रहों की ही तरह होते हैं लेकिन उनका आकार ग्रहों की तुलना में काफी छोटा होता है। ये आमतौर पर मंगल और बृहस्पति ग्रहों के इर्द-गिर्द रहते हुए सूर्य का चक्कर लगाते हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान कभी-कभी ये ये अपनी कक्षा के गुरुत्व बल से स्वतंत्र हो जाते हैं और भटकते हुए पृथ्वी की तरफ आ जाते हैं। यहीं इनका संपर्क पृथ्वी से होता है। इसी लिए इन्हें क्षुद्रग्रह कहा जाता है।
खगोलविद के रूप में अपने करियर को संवारने का सपना देखने वाले साहिल ने आईएएनएस को बताया, "मैं इस खोज को लेकर अत्यंत रोमांचित हूं। हमारा काम आंकड़ों को देखना और उनका अध्ययन करना था। हम प्रतिदिन जुटाई गई जानकारियों को नासा को भेजा करते थे। वे हमें बताया करते थे कि हम किसी क्षुद्रग्रह की खोज में सफल हुए हैं या नहीं।"
एआईएएससी का आयोजन 17 मई से 30 जून और एक जुलाई से 13 अगस्त के बीच किया गया। भारत में इसका आयोजन पहली बार हुआ। इसमें 30 से 45 स्कूलों को बच्चों को शामिल किया गया। इस वर्ष इस अभियान में चार महाद्वीपों के 11 देशों के स्कूली बच्चों ने हिस्सा लिया।
साहिल और अमन को अपने द्वारा खोजे गए क्षुद्रग्रह के नामकरण का इंतजार है। अंतर्राष्ट्रीय नियमों के मुताबिक हालांकि इस प्रक्रिया को पूरा होने में छह वर्ष लगेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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