रमजान में बढ़ जाती है हर शाम की रौनक
लखनऊ। मुस्लिमों के लिए सबसे खास महीना यानी रमज़ान का महीना आज से शुरू हो गया है। सुबह सहरी के वक्त मजिस्जों में आजाने भी आम दिनों से अलग लगने लगी। मानो खुदा खुद आकर सुबह लोगों को जगा रहे हों। लोगों को एक होकर रहने का संदेश देने वाला यह महीना लखनऊ के लिए भी काफी खास होता है। आज से लखनऊ की शाम भी आपको बदली-बदली सी लगेगी। आखिर क्यों न हो ये लखनऊ को उसकी गंगा-जमुनी पहचान जो याद दिलाता है।
लखनऊ के अमीनाबाद, नज़ीराबाद, चौक, राजाबाजार, नक्खास, ठाकुरगंज और मेहंदीगंज समेत कई इलाकों में अब अगले एक महीने तक हर शाम रौनक से भरी होगी। अमीनाबाद रौशनी में नहाने लगेगा और शाम होते ही मुसलमान भाईयों के लिए दुकाने सज जाएंगी। लखनऊ की फेमस कश्मीरी चाय की बड़ी-बड़ी केतलियां एक बार फिर बाजारों में दिखेंगी।
हुक्के का इंतजाम भी होता है यहां
इस शाम का नज़ारा भी काफी खास होता है। शाम को इफ्तार के वक्त सभी एक साथ रोज़ा खोलते हैं। उस समय वो चाहे घर में हों या ऑफिस में और या फिर बाज़ार में। हर जगह रौनक। रमज़ान के महीने में नज़ीराबाद रोड पर शाम को दुकाने जल्दी बंद हो जाती हैं। दुकानों के आगे सजती हैं तरह-तरह के व्यंजनों व पकवानों की दुकानें।
यहां के मुस्लिम खजूर से रोजा इफ्तार को शुभ मानते हैं। फिर पकौड़ी, खाजा और कश्मीरी चाय रोजेदारों को तरोताज़ा कर देती है। उसके बाद सिलसिला शुरू होता है शीरमाल, नहारी-कुलचे, शामी कवाब, बोटी कवाब, बिरयानी, और बहुत कुछ। वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हो चुके लखनऊ के शामी कबाब का लुत्फ उठाने यहां दूर-दूर से लोग आते हैं। यही नहीं चाइना बाजार स्थित रेस्त्रां नौशी जान समेत कई रेस्त्राओं में हुक्के का इंतजाम किया जाता है।
लखनऊ की गंगा-जमुनी संस्कृति
लखनवी शाम में केवल मुस्लिम नहीं बल्कि हिन्दू भाई भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। भारतीय जनता पार्टी से सांसद लालजी टंडन के नेतृत्व में पिछले कई वर्षों से इफ्तार पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है। पूर्व सांसद डा. अखिलेश दास, सपा नेता मुलायम सिंह यादव, कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी, समेत कई नेता व संगठनों के पदाधिकारी हर साल इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं।
इस मामले में लखनऊ के छात्र संगठन, शिक्षक संगठन, चिकित्सक संगठन, व्यापारी संगठन, आदि भी इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं। यही नहीं लखनऊ की कायस्थ महासभा, वैश्य महासभा, आदि भी इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लेती हैं। यह सिलसिला आज से शुरू भी हो जाएगा। कुल मिलाकर लखनऊ की यह पहचान अन्य शहरों के लिए मिसाल है।












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