जाति जनगणना को मंज़ूरी

बायोमिट्रिक जनगणना का दौर दिसंबर से शुरु होने की उम्मीद है. इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की फ़ोटो, उंगलियों के निशान और आँखों की पुतलियों की तस्वीरें ली जाएँगी. पहली अप्रैल से शुरु हुई जनगणना में जाति आधारित जनगणना किए जाने का ज़्यादातर राजनीतिक दलों ने समर्थन किया है.
मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने पहले ही कह दिया था कि वह जाति आधारित जनगणना के पक्ष में है. हालांकि भाजपा की मातृ संस्था आरएसएस इसके पक्ष में नहीं है. जबकि समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यू) ने ज़ोरदार ढंग से जाति आधारित जनगणना की मांग की थी. लेकिन इस मसले पर कांग्रेस में मतभेद थे. कई वरिष्ठ नेता इसके समर्थन में थे लेकिन कुछ इसका विरोध कर रहे थे.
क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने जाति आधारित जनगणना का समर्थन कर रहे थे लेकिन गृहमंत्री पी चिदंबरम सहित कई और बड़े नेता इसके पक्ष में नहीं थे. लेकिन दो दिन पहले सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस कोर समिति की बैठक में जाति आधारित जनगणना पर सहमति बन गई थी. जाति आधारित जनगणना को लेकर संसद में ज़ोरदार बहस हुई थी जिसमें सभी दलों ने इस पर अपनी राय रखी थी.
ज़्यादातर दलों के समर्थन के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि मंत्रिमंडल इस पर विचार करेगा. लेकिन मंत्रिमंडल में फैसला न हो पाने की वजह से इस विषय को एक मंत्रिमंडलीय समूह के पास भेज दिया गया था. मंत्रिमंडलीय समूह की शुरुआती बैठकों में इस पर फ़ैसला नहीं हो सका था.












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