मुंबई में टैक्सी, ऑटो के खिलाफ अभियान असफल

मुंबई के लोगों ने विज्ञापन एजेंसी के तीन कर्मचारियों द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन को हालांकि पूरा समर्थन दिया था लेकिन जिन लोगों के पास अपने वाहन नहीं हैं उन्हें ऑटो या टैक्सी का ही सहारा लेना पड़ा है।

एक यात्री कांति शाह ने कहा, "बसों के लिए लगने वाली लाइन बहुत लंबी होती हैं। मैं दफ्तर देर से नहीं पहुंचना चाहता। इसलिए मुझे रिक्शा करना पड़ता है।"

एक वित्तीय संस्था में काम करने वाले एक अन्य कर्मचारी कहते हैं, "मैं शाम को बस से जा सकता हूं, लेकिन सुबह देर होने के डर से ऐसा नहीं कर सकता।"

कुछ लोगों ने छोटी दूरी के लिए जरूर पैदल चलना मुनासिब समझा।

अरिंदम विश्वास ने कहा, "मैं अपने तीन किलोमीटर दूर स्थित कार्यालय जाने के लिए ऑटो लेता हूं लेकिन आज मैने बस से सफर किया। मैनें इस अभियान का समर्थन किया है।"

विज्ञापन एजेंसी के कर्मचारी जयदेव रूपानी, रिचा बरार और अभिलाष कृष्णन ने यह अभियान सोशल नेटवर्किं ग साइट के जरिए शुरू किया था। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि लोग अपने वाहनों में अन्य लोगों को लिफ्ट दें और लोगों को बसों के रास्तों की जानकारी उपलब्ध कराएं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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