गोवा में गिरजाघर आलोचनाओं से घिरा
पणजी से 20 किलोमीटर की दूरी पर मांडवी नदी के बीच में स्थित वेनजिम नामक छोटे से द्वीप पर रहने वाले ग्रामीणों ने गिरजाघर और प्रशासन के ऊपर सांठगांठ का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों ने द्वीप को बेंगलुरू की आलीशन रिसॉर्ट बनाने वाली एक कंपनी को औने-पौने कीमत पर बेचने का आरोप लगाया है। अधिकतर ग्रामीण द्वीप पर किरायेदार के रूप में रहते हैं।
द्वीप पर रहने वाले एक ग्रामीण मैग्गी सिलवेरिया द्वीप की बिक्री को रद्द करने के लिए मुहिम चला रहे हैं। सिलवेरिया ने कहा, "हम लोग वेनजिम द्वीप पर वैध तरीके से रहते हैं। उप जिलाधिकारी अधिकतर ग्रामीणों पर खेती न करने का दबाव डाल रहे हैं। 'आर्कडियोसिस ऑफ चर्च' ने गलत संसाधनों का इस्तेमाल कर जमीन पर कब्जा किया है।"
उन्होंने कहा, "हम कई बार गिरजाघार के पादरी विक्टर फेरानो से मिल चुके हैं। उन्होंने शुरुआत में तो कहा कि वह जमीन वापस ले लेंगे और रिसॉर्ट कंपनी का पैसा लौटा देंगे।"
गौरतलब है कि गोवा कृषि किरायेदारी अधिनियम-1964 के अनुसार किरायेदार अगर लगातार पट्टे वाली जमीन पर तीन साल तक खेती नहीं करता है तो मालिक अधीन हो जाएगी और इस पर किरायेदार का कोई अधिकार नहीं रहेगा।
पुर्तगालियों के शासन के दौरान 450 साल पहले इस भूमि को पादरियों को उपहार स्वरूप दे दी गई थी। उस समय ज्यादातर किसान चर्च के किराएदार के रूप में रहते थे। उसी समय से यह भूमि आर्कडियोसिस ऑफ चर्च के अधीन है।
इधर गिरजाघर के पादरी फादर विक्टर रोडरिग्स ने कहा है कि द्वीप को बेचने में हमारी कोई भूमिका नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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