क्या कभी पूरे होंगे इन बहनों के सपने?
कानपुर। कभी-कभी बुलंद इरादों के सामने मुश्किल से मुश्किल हालातों का कद भी बौना पड़ जाता है। लेकिन यदि ये हिम्मत दो छोटी-छोटी बच्चियां दिखा रही हो तो वाकई इन हिम्मती लड़कियों के सामने सिर झुकाने का मन करेगा। कानपुर की 9 साल की मुस्कान और 15 साल की सृष्टि अपने 14 साल के भाई अनुज को बचाने के लिए रात-दिन कानपुर की गलियों में घूम-घूम कर जूते पॉलिश कर रही हैं।
अनुज अविकासी रत्ताल्पता का शिकार है, उसका इलाज सिर्फ अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण(बोन मैरो ट्रांसप्लांट) द्वारा ही संभव है। इसके लिए अनुज के परिवार को 20 लाख रुपये जुटाने हैं। लेकिन अनुज के पिता के लिए इतने रुपये जुटाना एक सपना ही है। क्योंकि वे पेशे से एक स्कूटर मैकनिक हैं। 43 साल के मनीष बहल पहले ही अपने बेटे के इलाज के लिए अपना सब कुछ गिरवी रख चुके हैं।
दोनों बहनें हाथ में 'मेरे भाई को बचाओ' लिखी तख्ती लेकर शहर के अलग-अलग मुहल्लों, बाजारों, बस स्टेशन और रेलवे स्टेशन जैसे भीड़-भाड़ वाले जगहों पर जाकर लोगों से जूते-चप्पल पॉलिश कराने का अनुरोध करती हैं। कक्षा 5 में पढ़ने वाली मासूम मुस्कान कहती हैं, "मैं अपने भाई को जल्द से जल्द घर ले जाना चाहती हूं। भाई के इलाज के पैसे जुटाने के लिए मै कठिन परिश्रम करूंगी। मेहनत से इकट्ठा किये पैसे हम चिकित्सकों के देंगे जो हमारे भाई का इलाज करेंगे।" हर दिन सृष्टि और मुस्कान स्कूल से वापस लौटने के बाद अपने काम पर निकल पड़ती हैं।
मनीष बताते हैं कि 'चिकित्सकों के मुताबिक मेरे बेटे का ऑपरेशन करना पड़ेगा, जिसमें करीब 20 लाख रुपये का खर्च आएगा। मेरी बेटियों को यह बात पता है कि उनके पिता अकेले इलाज के लिए इतने सारे पैसे नहीं जुटा सकते हैं। इसलिए वे कठिन मेहनत से पैसे इकट्ठा करके अपने पिता का सहारा देने की कोशिश कर रही हैं। मनीष कहते हैं "वैसे तो मुझे पता है कि मेरी बेटियां जूते पॉलिश करके कभी भी 20 लाख रुपये नहीं जुटा सकती हैं, लेकिन उनका जज्बा और कठिन परिश्रम मुझमें सकारात्मक सोच का संचार करता हैं। मुझे ऐसी बेटियों का पिता होने पर गर्व महसूस होता है।"












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