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क्या है एनडीएम-1?

By Staff
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क्या है एनडीएम-1?
ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने भारत और पाकिस्तान में पाए जाने वाले एक नए क़िस्म के बैक्टीरिया की दुनियाभर में सख़्त निगरानी का आहवान किया है. बैक्टीरिया का नाम है सुपरबग : एनडीएम -1.

क्या होता है एनडीएम-1?

एनडीएम-1 का पूरा मतलब है 'नई दिल्ली मेटैलो-बीटा-लैक्टामेज़-1'. ये एक ऐसा एंज़ाइम है जो अलग तरह के बैक्टीरिया के अंदर आसानी से रह सकता है. इस एंज़ाइम को जो भी बैक्टीरिया अपने साथ लेकर चलेगा उसपर कार्बापेनेम प्रतिजैविक (ऐंटीबायोटिक) का कोई असर नहीं हो पाएगा.

यही सबसे बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि ये ऐंटीबायोटिक सबसे शक्तिशाली माना जाता है. जिन संक्रामक रोगों (इंफ़ेक्शन) पर दूसरी कई दवाईयों का असर नहीं हो पाता है, उन पर कार्बापेनेम ऐंटीबायोटिक ही असर कर पाता है.

चिंता क्यों करनी चाहिए?

एनडीएम-1 बैक्टीरिया किसी एक नस्ल को छोड़कर दूसरी नस्ल पर आसानी से छलांग मार लेता है. विशेषज्ञों को डर है कि अब एक और ऐसा बैक्टीरिया आ जाएगा जिसपर कई ऐंटीबायोटिक्स का कोई असर नहीं होगा.

नतीजा ये होगा कि ये बैक्टीरिया इतने ख़तरनाक संक्रामक रोगों को पैदा कर देगा जो किसी एक इंसान से दूसरे इंसान तक बहुत जल्दी फैलेंगे और इनका इलाज लगभग नामुमकिन हो जाएगा.

क्या इसका कोई इलाज है?

एनडीएम-1 से पनपने वाले कुछ संक्रमणों के इलाज के और विकल्प तो हैं लेकिन उसके लिए कई ऐंटीबायोटिक्स का सही मिश्रण बनाना पड़ेगा जिसकी सफलता अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. वैज्ञानिकों ने तो इस बैक्टीरिया की कुछ ऐसी नस्लों की पहचान की है जिनपर किसी भी ऐंटीबायोटिक का असर ही नहीं होता है.

बीमारी का कैसे पता करें?

अभी तक ब्रिटेन में जितने लोगों में ये रोग पाया गया है उनमें से ज़्यादातर मरीज़ वो हैं जो हाल-फ़िलाल ही भारत और पाकिस्तान में कोई चिकित्सीय उपचार करा चुके हैं और ये संक्रमण उनमें वहाँ रहकर ही आया था. लेकिन इनमें से कुछ मरीज़ों के लौटने पर ये रोग ब्रिटेन के अस्पतालों में भी फैल गया.

जिन संक्रामक रोगों की पहचान हुई है उनमें से कुछ हल्के हैं तो कुछ काफ़ी गंभीर. यहाँ तक कि कुछ प्रकार के बैक्टीरिया ऐसे भी हैं जिनसे मरीज़ की मौत हो सकती है. दो प्रकार के बैक्टीरिया एनडीएम-1 के साथ मिल रहे हैं. पहला है आँतों में रहने वाला ई-कोलाई बैक्टीरिया और दूसरा है क्लेबसिएला निमोनिया जो फेफड़ों पर हमला करता है. इन दोनों ही बैक्टीरिया से ख़ून में ज़हर और यूरिनरी ट्रैक्ट में संक्रमण (इंफ़ेक्शन) फैल सकता है. इस तरह के इंफ़ेक्शन का पता मरीज़ों में चिकित्सक जाँच के ज़रिए ही लग पाता है.

क्या इसे फैलने से रोका जा सकता है?

विशेषज्ञों के अनुसार इसे रोकने के लिए कड़ी निगरानी और इसकी जल्दी पहचान करन की ज़रूरत है. इससे संक्रमित मरीज़ों को अस्पताल में बिल्कुल अलग रखना चाहिए. जो साधारण आम दिनचर्या में सावधानी बरती जाती है वो सब करने की ज़रूरत है.

जैसे अस्पतालों के सभी उपकरणों में से संक्रमण को निकाला जाए, डाक्टर और नर्स अपने हाथों को हमेशा ऐंटीबैक्टीरियल साबुन से धोएं तो इसे फैलने से रोका जा सकता है. एनडीएम-1 पहले से ही भारत में फैल चुका है और अमरीका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड्स जैसे देशों में भी पहुँच चुका है. वैज्ञिनिकों का मानना है कि ये बैक्टीरिया विश्व भर में लोगों के स्वास्थय का बड़ा मुद्दा बन सकता है. उनका कहना है कि उन्हें इसके इलाज के लिए नई दवाइयाँ बनानी होंगी.

क्या किसी नए ऐंटीबायोटिक से मदद मिल सकती है?

नए ऐंटीबायोटिक्स को बनाने के लिए बहुत पैसा निवेश करना पड़ेगा. विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक जितनी भी दवाइयाँ बनी हैं वो एनडीएम-1 पॉज़िटिव मरीज़ का इलाज नहीं कर पाएंगी. ऐसा इसलिए है क्योंकि जिस बैक्टीरिया पर एनडीएम-1 बैक्टीरिया होता है वो ख़ुद ग्राम निगेटिव होता है जबकि अभी तक जो काम हुआ है वो एमआरएसए जैसे ग्राम पॉ़ज़िटिव बग के लिए हुआ है.

हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी (एचपीए) का कहना है, "ग्राम –निगेटिव बैक्टीरिया से लोगों के स्वास्थय को ख़तरा है और औषधीय उद्योगों में इलाज के नए विकल्पों पर काम करते रहना बेहद ज़रूरी है."

अब क्या होगा?

ब्रितानी सरकार ने कहा है कि एचपीए स्थिति पर निगरानी रखने का काम जारी रखेगा और आँकड़ों की समीक्षा लगातार करता रहेगा. इस बीच ब्रिटेन के अस्पतालों को कहा गया है कि वो संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सही कदम उठाएँ और उन मरीज़ों पर भी ध्यान रखें जिनका हाल ही में विदेश में इलाज हुआ है.

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