राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित (लीड-1)
सदन में प्रश्नकाल शुरू होते ही मनोहर जोशी के नेतृत्व में शिवसेना के सदस्यों ने सभापति हामिद अंसारी से बेलगाम के मुद्दे पर चर्चा की अनुमति मांगी।
सभापति ने अनुमति देने से इंकार करते हुए कहा कि मामला इस समय न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में इसे सदन में नहीं उठाया जा सकता।
इस पर जोशी के नेतृत्व में शिवसेना सदस्य अंसारी के आसन के समीप एकत्र हो गए। बार-बार आग्रह के बावजूद वे चर्चा कराने की मांग करते रहे। इससे बाध्य होकर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए 11.30 बजे तक स्थगित कर दी।
केंद्र सरकार ने जुलाई की शुरुआत में सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल एक शपथ पत्र में कहा था कि केवल मराठी भाषी लोगों की बहुलता के कारण ही इलाके को महाराष्ट्र में नहीं शामिल किया जा सकता। इसके बाद से ही महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद चर्चा के केंद्र में आ गया है।
शून्यकाल के दौरान ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) सदस्य वी.मैत्रियन और कांग्रेस तथा द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के सदस्यों के बीच तीखी बहस के कारण दूसरी बार राज्यसभा को 20 मिनट के लिए स्थगित किया गया।
सदन में मैत्रियन के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के स्वीकार किए जाने पर कांग्रेस और डीएमके के सदस्यों ने एआईएडीएमके सदस्य द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण पर आपत्ति जताते हुए इसे अप्रासंगिक बताया।
सभापति के बार-बार के आग्रह के बावजूद उत्तेजित सदस्यों के शांत नहीं होने पर नाराज मैत्रियन ने कहा, "यदि यह जारी रहा तो मैं नहीं बोलूंगा।"
हंगामे के बीच सभापति ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित कर दी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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