राष्ट्रमंडल खेलों पर सबकी चिंता जायज : गिल
लोकसभा में 'राष्ट्रमंडल खेल-2010 की तैयारी में विलंब से उत्पन्न स्थिति' पर चर्चा के जवाब में मंगलवार को गिल ने कहा, "मैंने पूरी चर्चा पर गौर किया। सबने इस पर चिंता जताई। मैं सभी की चिंता को जायज मानता हूं। ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि हिंदुस्तान की इज्जत का सवाल है।"
उन्होंने कहा, "नवंबर, 2003 में जमैका में राष्ट्रमंडल खेल महासंघ, भारत सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के बीच हुए समझौते के अनुसार खेलों के आयोजन की जिम्मेदारी आईओए को दी गई। आईओए ने ही आयोजन समिति का गठन किया। इसके तहत ही पूरा काम आगे बढ़ा। इस समझौते में ही यह बात भी थी कि पूरे खर्च का वहन केंद्र सरकार करेगी। परंतु अगर खेलों में कोई मुनाफा होता है तो उसमें सरकार का हिस्सा नहीं होगा।"
खेल मंत्री ने निर्माण कार्यों में देरी और अधूरेपन पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इस संदर्भ में मीडिया पर चुटकी ली। गिल ने कहा, "निर्माण कार्यो में अगर कुछ छूट गया है तो उसको सुधारा जा रहा है। इस बीच मीडिया भी कुछ बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। जहां कहीं भी कमी है, उसे दूर किया जा रहा है।"
गिल ने कहा, "केंद्र सरकार के जिम्मे कुल 13 स्टेडियमों का निर्माण था। इनमें से नौ स्टेडियम बड़े हैं। सभी स्टेडियम लगभग तैयार हैं। मैं यकीन दिलाना चाहता हूं कि एक महीने के भीतर सभी चीजें दुरुस्त कर ली जाएंगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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