आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता : अमेरिकी प्रतिनिधि

नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। मुस्लिम देशों के संगठन 'ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कांफ्रेंस' (ओआईसी) में अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि रसहद हुसैन का कहना है कि इस्लामी आतंकवाद' जैसी कोई चीज नहीं है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता और दुनिया भर में अच्छे लोग दहशतगर्दी को सिरे से खारिज करते हैं।

हुसैन भारतीय मूल के हैं। वह नौ दिनों के भारत दौरे पर हैं। उन्होंने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "दुनिया भर के धार्मिक नेताओं और समुदाय को यह स्पष्ट कर लेना चाहिए कि आतंकवाद की विचारधारा एक है। इस विचारधारा को सभी धर्मो के लोग खारिज करते हैं और इसकी जड़ें किसी मजहब से नहीं जुड़ी हैं।"

अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा, "हमारी नीति स्पष्ट है। अगर सभी देश मिलकर काम कर करें तो हम इस मुद्दे को प्रभावी ढंग से पेश कर पाएंगे।"

हुसैन ने कहा कि आतंकवाद का इस्लाम से कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं इस्लामी आतंकवाद जैसी किसी भी बात को सिरे से खारिज करता हूं। आतंकवाद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं है।"

उन्होंने कहा, "आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता है। यह पूरी दुनिया में सभ्य लोगों द्वारा खारिज किया जाता है। इसे मुस्लिम, हिंदू, यहूदी और ईसाई सभी खारिज करते हैं। ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए हमें मिलकर काम करना चाहिए।"

हुसैन के माता-पिता बिहार से अमेरिका गए थे। वह कुरान के जानकार होने के साथ ही बास्केटबॉल के बड़े प्रशंसक हैं। वर्ष 2008 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान 32 साल के हुसैन को व्हाइट हाउस में बुलाया गया जहां उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा नवीन मीडिया के मुद्दों पर काम किया।

बराक ओबामा प्रशासन में हुसैन सबसे कम उम्र के प्रतिनिधि हैं। उनका कहना है कि अमेरिका के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों महत्वपूर्ण सामरिक साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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