लेह त्रासदी : मृतकों की संख्या 132 हुई, विदेशी पर्यटक सुरक्षित (राउंडअप इंट्रो-1)
पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर क्षेत्र) फारूक अहमद ने यहां कहा कि मृतकों की संख्या बढ़कर 132 हो गई है और 60 शवों की पहचान की जा चुकी है। दुर्घटना में कम से कम 400 से लोग घायल हुए हैं। खराब मौसम के कारण सुबह रोका गया बचाव कार्य फिर शुरू कर दिया गया है। अहमद ने कहा कि मृतकों या लापता लोगों में कोई भी विदेशी पर्यटक शामिल नहीं है। वे सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं।
इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री गुलाम नबी आजाद चिकित्सकों के एक दल के साथ कस्बे में पहुंच चुके हैं। फंसे हुए पर्यटकों को निकालने के लिए इंडियन एयरलाइंस ने अतिरिक्त उड़ानें शुरू कर दी हैं। केंद्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री, फारुक अब्दुल्ला भी राहत एवं बचाव कार्य का जायजा लेने लेह पहुंचे हैं।
गुलाम नबी आजाद एक विशेष विमान से अपराह्न् लेह पहुंचे। विमान में दवाएं, खाद्य पदार्थ और तंबू भी थे। वायुसेना ने भी दो विमानों में राहत सामग्री भेजी है।
स्थानीय अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है। भारतीय सेना के 25 जवानों सहित 100 लोग अब भी लापता हैं।
फंसे हुए पर्यटकों को निकालने के लिए इंडियन एयरलाइंस ने तीन अतिरिक्त उड़ानों को संचालित करने का फैसला किया है। एक उड़ान जम्मू से और दो उड़ानें दिल्ली से।
फारूक अब्दुल्ला जिस राज्य सरकार के विमान से शनिवार को लेह पहुंचे, उसने मीडिया कर्मियों को श्रीनगर से लेह लाने के लिए एक और चक्कर लगाया।
शुक्रवार को लेह का दौरा करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीड़ितों को राहत के लिए तत्काल पांच करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की। लेह हवाईअड्डे के रनवे से उड़ानों को फिर शुरू किए जाने के बाद उमर वहां पहुंचे थे। रनवे पर बाढ़ का पानी और कीचड़ जमा हो गया था।
पुलिस ने करीब 2,000 प्रभावित लोगों के लिए लेह कस्बे और चोगलमसर गांव में रहने की व्यवस्था की है।
बचाव और राहत कार्य में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सेना के करीब 6,000 जवान तैनात किए गए हैं। प्रभावित इलाकों में सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है।
बाढ़ से एक पॉलीटेक्निक कॉलेज, भारत संचार निगम लिमिटेड का मुख्यालय, ऑल इंडिया रेडियो केंद्र और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के शिविर सहित कई सरकारी कार्यालय और इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं हैं।
बीएसएनएल के महाप्रबंधक ने कहा कि आरंभिक अनुमान के अनुसार उपकरणों के क्षतिग्रस्त होने से करीब 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
बीएसएनएल मुख्यालय क्षतिग्रस्त होने से लेह से संपर्क बाधित है। लेह इलाके में एक अन्य सेवा प्रदाता कंपनी एयरटेल ने हेल्पलाइन स्थापित करने के लिए स्थानीय अधिकारियों को सिम कार्ड दिए हैं।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राज्यपाल एन.एन.वोहरा ने इस आपदा के कारण हुई जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त किया है और हर संभव मदद का भरोसा दिया है।
इस बीच शनिवार को राहत एवं बचाव कार्य के लिए वायुसेना के छह विमान राहत कर्मियों और राहत सामग्रियों के साथ लेह पहुंचे।
थलसेना ने भी त्रासदी के बाद से अपने आपदा प्रबंधन प्रकोष्ठ को युद्धस्तर पर सक्रिय कर दिया है।
वैसे तो सेना के राहत कार्य की प्राथमिकता जान-माल को बचाना है, लेकिन सैनिक, प्रभावित लोगों को भोजन, पानी, दवाएं भी मुहैया करा रहे हैं।
लेह हवाई अड्डे पर सेवाएं बहाल हो जाने बाद वायुसेना के छह विमान आपदा प्रतिक्रिया दलों, चिकित्सकों, संचार उपकरणों और दिल्ली व चंडीगढ़ से सामग्रियों को लेकर वहां उतरे।
रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि इन छह विमानों के पहुंचने के साथ ही राहत एवं बचाव अभियान में तेजी आ गई है।
वायुसेना के दो इल्युशिन-76 और चार एंटोनोव-32 विमानों पर 30 टन का वजन लदा था। इनमें 125 राहत एवं बचाव कर्मी, दवाएं, जनरेटर, तंबू, पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें और आपात राहत किट शामिल थे।
विशेषज्ञ चिकित्सकों और शल्य चिकित्सकों सहित दिल्ली से केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दो दल भी लेह पहुंच गए हैं।
प्रवक्ता ने कहा कि मलबे से 110 शवों को बरामद किया जा चुका है।
प्रवक्ता ने कहा, "अब तक 500 से अधिक घायलों का लेह के सैन्य अस्पताल में इलाज किया जा चुका है और लगभग 100 घायलों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। विदेशी पर्यटकों और गैर स्थानीय लोगों के शवों को दिल्ली तक ले जाने के लिए लेह से असैन्य उड़ानों की अनुपलब्धता की स्थिति में विशेष सहयोग के रूप में वायुसेना इन शवों को ढोने के लिए तैयार हो गया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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