कश्मीर में हिंसा की घटना नहीं, आंशिक कर्फ्यू हटा (राउंडअप)

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि श्रीनगर के राजबाग, शेरगढ़ी, राममुंशी बाग, कोठी बाग, निशात, करन नगर और पांथा चौक सहित नौ पुलिस थाना क्षेत्रों में सुबह दो घंटे की ढील दी गई।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यहां कहा, "हालात में सुधार के बाद श्रीनगर के नौ थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू में दी गई ढील को शाम तक बढ़ा दिया गया और बाद में इन इलाकों से कर्फ्यू को पूरी तरह हटा लेने का निर्णय लिया गया।"

इसके अलावा उत्तर कश्मीर के गांदरबल जिले, हंदवारा कस्बे और मध्य बडगाम जिले से भी कर्फ्यू उठा लिया गया है। लेकिन श्रीनगर के पुराने शहरी इलाके के साथ ही उत्तर कश्मीर के बारामूला, सोपोर और कुपवाड़ा तथा दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, पुलवामा, सोपियां और कुलगाम कस्बों में कर्फ्यू पूरी तरह जारी है।

पिछले 30 जुलाई के बाद से शनिवार पहला ऐसा दिन रहा है, जब घाटी में कई जगह आयोजित हुए विरोध प्रदर्शनों में कोई व्यक्ति घायल नहीं हुआ है। आमतौर पर शनिवार को विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे।

इस बीच जम्मू एवं कश्मीर के सोपोर कस्बे में शुक्रवार को सुरक्षा बलों की गोलीबारी में घायल एक 22 वर्षीय युवक की शनिवार को श्रीनगर के एक अस्पताल में मौत हो गई।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि रमीज अहमद रिसी शुक्रवार को सोपोर में तब घायल हुआ था, जब एक भीड़ ने वारपोरा पुलिस थाने पर हमला किया था।

रिसी को गोली लगी थी और शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने कहा कि काफी प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

अधिकारियों ने श्रीनगर में लगातार आठवें दिन अनिश्चितकालीन कर्फ्यू जारी रखा। इस बीच नागरिकों ने आवश्यक वस्तुओं की कमी की शिकायत की है।

श्रीनगर के पुराने शहर में रहने वाले मसूद अहमद (45 वर्ष) ने कहा कि उनके घर में केवल एक दिन का राशन है। यदि उनको राशन, रसोई गैस आदि की खरीद नहीं करने दी गई तो उनके परिवार के भूखे रहने की आशंका है।

घाटी में ईंधन की आपूर्ति लगातार पांचवें दिन स्थगित रही। तेल टैंकर एसोसिएशन ने जम्मू से तेल लाने से इंकार करते हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए नुकसान की भरपाई करने की मांग की।

दूसरी ओर जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी नेताओं द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम की वार्ता की पेशकश को तवज्जो न देने की खबर है। हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धड़े के नेता सैयद अली गिलानी ने वार्ता की पेशकश को ठुकरा दिया है, जबकि नरमपंथी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारुक ने चुप्पी साध ली है।

जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फंट्र (जेकेएलएफ) ने चिदंबरम की पेशकश को 'सरासर पाखंड' बताया है। उसका कहना है कि वार्ता और हत्याएं साथ-साथ नहीं चल सकतीं।

गिलानी ने शुक्रवार देर शाम पत्रकारों से बातचीत में कहा था, "मैं किसी भी तरह की वार्ता में हिस्सा लेने के पक्ष में तब तक नहीं हूं, जब तक कि जम्मू एवं कश्मीर को विवादित क्षेत्र घोषित करके वहां से सेना को वापस नहीं बुलाया जाता और कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र में पारित प्रस्ताव को लागू नहीं किया जाता।"

गिलानी ने कहा कि कश्मीर पर उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। "गृह मंत्री की पेशकश को मैं खारिज कर रहा हूं। यह मुझे अलग-थलग करने और जारी विरोध प्रदर्शन को दबाने की साजिश है।"

चिदंबरम ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा था कि सरकार जम्मू एवं कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया को दोबारा सक्रिय करने के लिए प्रतिबद्ध है और यदि कट्टरपंथी अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी वार्ता में शामिल होते हैं तो 'बहुत खुशी' होगी।

राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक फंट (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि किसी भी प्रकार की वार्ता बहाली की कोशिश से पहले सरकार को विश्वास बहाली की दिशा में कदम उठाने चाहिए। प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार लोगों की रिहाई इस दिशा में पहला कदम होना चाहिए।

नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता व राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री अली मोहम्मद सागर ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अलगावादियों व केंद्र सरकार के बीच वार्ता आरंभ करने की कोशिशों में लगे हुए हैं।

पिछले आठ दिनों के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी से कश्मीर में 32 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। इस तरह 11 जून से शुरू हुई हिंसा में अब तक 49 लोग मारे जा चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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