कराची में देखते ही गोली मारने का आदेश, 85 मरे

पाकिस्तानी समाचार पत्र ट्रिब्यून के मुताबिक हिंसा रोकने के लिए पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक ने आदेश जारी किया है कि दहशतगर्दो को देखते ही गोली मार दी जाए। जातीय हिंसा में अब तक यहां 85 लोगों की मौत हो गई है।

गुरुवार शाम को इस्लामाबाद पहुंचे मलिक ने पत्रकारों से कहा, "हिंसा, आगजनी और हत्या करने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है और जांच एजेंसियां इनसे पूछताछ कर रही हैं।"

मलिक ने कहा, "मैं नशा माफिया, भू माफिया, और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को अपनी नृशंस गतिविधियां बंद करने की चेतावनी देता हूं, अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

उन्होंने कहा, "अब आतंकवादियों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।" प्रशासन ने अपनी रणनीति बदल दी है और इसका असर पिछले 48 घंटों में कराची में देखने को मिला है।

सिंध प्रांत की विधानसभा के सदस्य हैदर की अज्ञात हमलावरों ने सोमवार को निजामाबाद इलाके में एक मस्जिद के बाहर उस समय हत्या कर दी थी जब वह एक जनाजे में शरीक होने गए थे। इस हमले में उनका अंगरक्षक भी मारा गया था।

हत्या के तुरंत बाद कराची, हैदराबाद और सिंध के अन्य शहरों में हिंसा भड़क उठी। प्रदर्शनकारी बंदूकों और हथियारों से लैस होकर सड़कों पर उतर आए तथा वाहनों के साथ ही दर्जनों दुकानों, पेट्रोल पंपों को आग के हवाले कर दिया।

गुरुवार को भी यहां की सड़कें सुनसान नजर आईं और दुकानें बंद रहीं। हाथों में बंदूक थामे प्रदर्शनकारी मोटरसाइकिलों पर सवार होकर पूरे शहर में घूम रहे हैं।

वर्ष 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद भारत से कराची आए ऊर्दू-भाषी लोगों और पश्चिमोत्तर के खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत के पश्तो-भाषी लोगों के बीच यहां जातीय हिंसा का पुराना इतिहास रहा है। जातीय हिंसा के चलते पिछले दो साल के दौरान यहां 1500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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