लेह में बाढ़ से 80 मरे, 300 से अधिक घायल (लीड-3)

श्रीनगर/नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर के लेह कस्बे में बादल फटने के कारण आई बाढ़ में कम से कम 80 लोग मारे गए और 300 से अधिक घायल हुए हैं। बाढ़ से लद्दाख क्षेत्र में कई सरकारी इमारतें और आवास क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लेह कस्बे में बादल फटने के कारण मरे लोगों के प्रति शोक प्रकट करते हुए मृतकों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की घोषणा की।

प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया, "प्रधानमंत्री ने त्रासदी में मारे गए लोगों के परिजनो के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से एक-एक लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए 50,000 रुपये की मदद को मंजूरी दी है।"

पुलिस महानिरीक्षक (कश्मीर क्षेत्र) फारूक अहमद ने आईएएनएस से कहा कि गुरुवार मध्य रात्रि को कस्बे के समीप बादल फटने के बाद भारी बाढ़ आई और भूस्खलन हुआ।

उन्होंने बताया कि पुलिस ने रात में ही बचाव कार्य शुरू किया और अब तक 80 शव बरामद किए जा चुके हैं। सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान भी राहत और बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पीड़ितों के लिए तंबुओं और राशन का बंदोबस्त किया गया है। चार पुलिसकर्मी भी लापता हैं।

पुलिस ने कहा कि लेह के अस्पतालों में 300 से अधिक घायलों को भर्ती कराया गया है।

सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि उनके करीब 6,000 जवान राहत कार्य में शामिल हैं। राहत कार्यो में हेलीकॉप्टरों को भी लगाया गया है।

इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि बाढ़ में मरने वालों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है क्योंकि कस्बे में संचार के सभी साधन ठप्प हो गए हैं।

आजाद ने संसद भवन के बाहर संवाददाताओं से कहा, "हम लद्दाख से एक मंत्री (नुवांग रिगजिन जोरा) से संपर्क करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है क्योंकि क्षेत्र से संपर्क के सभी साधन नष्ट हो गए हैं। हमें मरने वालों की वास्तविक संख्या का भी पता नहीं है।"

इस घटना में एक पॉलीटेक्निक कॉलेज, भारत संचार निगम लिमिटेड का मुख्यालय और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के शिविर सहित कई सरकारी कार्यालय और इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं हैं।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि लेह हवाई अड्डे के रनवे पर पानी भर गया है और वहां सड़क संपर्क भी बाधित हुआ है।

बीएसएनएल मुख्यालय के तबाह होने से कस्बे में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई है और श्रीनगर से लेह के अधिकारियों से संपर्क करने में कठिनाई हो रही है।

उधर, लेह हवाईअड्डे पर पानी भरने के कारण वायु सेना ने शुक्रवार को चण्डीगढ़ से लद्दाख की उड़ानों को रद्द कर दिया।

वायु सेना के एक अधिकारी ने कहा कि रनवे पर पानी भरे होने के कारण चण्डीगढ़ से लद्दाख के लिए किसी विमान ने उड़ान नहीं भरी।

समुद्र तल से 3,524 मीटर की ऊंचाई पर स्थित लेह 45,110 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैला हुआ है। इसमें मुख्य कस्बे सहित 12 गांव शामिल हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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