ब्लैकबेरी के बचाव में उतरी कनाडा की सरकार (लीड-1)

टोरंटो, 6 अगस्त (आईएएनएस)। कनाडाई सरकार और समाचार माध्यम भारत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में ब्लैकबेरी की सेवाओं के बचाव में उतर आए हैं। कंपनी के प्रमुख अपनी बात पर अड़े हुए हैं और उनका आरोप है कि ब्लैकबेरी को अन्यायपूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री पीटर वेन लोन ने कंपनी को अपनी सेवाओं पर दृढ़ रहने की सलाह देते हुए कहा, "कनाडाई कंपनी होने के नाते हमारी सरकार रिसर्च इन मोशन (आरआईएम) और ब्लैकबेरी के साथ है।"

डाउ जोंस से उन्होंने कहा, "ऐसी चुनौतियों की स्थिति में हम हमेशा अपनी कंपनियों का साथ देते हैं। आरआईएम को इस तरह के दबाव के सामने दृढ़ रहना चाहिए।"

कनाडाई समाचार माध्यम तो ब्लैकबेरी पर प्रतिबंध लगाने जा रहे देशों से उनके मानवाधिकारों के संबंध में सवाल खड़े कर रहे हैं।

'द ग्लोब एण्ड मेल' ने कहा है कि जो सरकारें ईमेल और एसएमएस के जरिए संदिग्ध आतंकवादियों की पहचान करना चाहते हैं वे बाद में इसके जरिए असंतुष्टों की पहचान भी करना शुरू कर देंगे। "आरआईएम इसकी इजाजत नहीं दे सकती।"

आरआईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माइक लेजार्डिस ने कहा कि इंटरनेट वेबसाइट संचालकों को भी ब्लैकबेरी से यह सीखने की बात है कि लोग अपने संदेशों को निजी रखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, "यह इंटरनेट से संबंधित है। इंटरनेट पर सब कुछ परिवर्तित गुप्त भाषा में प्रसारित होता है। यह केवल ब्लैकबेरी का मुद्दा नहीं है। यदि वे इंटरनेट को संभाल नहीं सकते तो उन्हें यह भी बंद कर देना चाहिए।"

लेजार्डिस ने कहा, "लेकिन हम यह कोशिश जारी रखेंगे कि वे इंटरनेट की सच्चाई को समझें। इन देशों के ज्यादा लोग पीएचडी नहीं हैं और उनके पास कंप्यूटर विज्ञान में डिग्री नहीं है।"

वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी के फोन को अन्यायपूर्ण तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। ब्लैकबेरी की सुरक्षित संचार सेवाओं को जांच के दायरे में लाने से इन देशों में इलेक्ट्रानिक व्यापार का विकास प्रभावति होगा।

आरआईएम के सामने यह चुनौती है कि वह इन विदेशी राष्ट्रों को इंटरनेट और ब्लैकबेरी की सेवाओं के बारे में शिक्षित बनाए।

ब्लैकबेरी प्रमुख ने कहा कि आरआईएम इन सरकारों को समझाने की कोशिश कर रही है कि लोग इंटरनेट को सुरक्षित संचार के साधन के रूप में देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, "हम इस मुद्दे से पहले भी निपट चुके हैं। इसका समाधान हो जाएगा। यदि इस विषय पर सकारात्मक बहस हो तो इसका समाधान हो जाएगा।"

उन्होंने कहा कि आरआईएम हालांकि इन देशों के प्रशासन से सहयोग कर रही है। यदि निजी संचार की कानूनी समीक्षा के लिए न्यायालय से आदेश मिलता है तो हम उन्हें सांकेतिक भाषा उपलब्ध कराएंगे। यह टेलीफोन टेपिंग की तरह होगा।

भारत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इंडोनेशिया और बहरीन ने आरआईएम के फोन से सांकेतिक भाषा में प्रसारित होने वाले ईमेल को लेकर सुरक्षा चिंताएं जताई हैं। यह ईमेल आरआईएम के निजी सर्वर के जरिए प्रसारित होते हैं और आरआईएम का कहना है कि उसके पास इस सांकेतिक भाषा को अपने स्तर पर परिवर्तित करने की कोई तकनीक नहीं है।

सऊदी अरब शुक्रवार से ब्लैकबेरी पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है वहीं संयुक्त अरब अमेरिका ने 11 अक्टूबर से इस पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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