लोकसभा ने कहा, महंगाई का बोझ कम करे सरकार (लीड-2)
महंगाई के मुद्दे पर दो दिनों तक चली चर्चा के बाद लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस प्रस्ताव को पढ़ते हुए कहा, "सम्मानित सदस्यों, यह सदन देश की अर्थव्यवस्था पर पड़े मुद्रास्फीति के दबाव को ध्यान में रखते हुए सरकार से आम आदमी पर पड़ने वाले इसके प्रतिकूल असर को कम करने लिए कदम उठाने को कहता है।"
प्रस्ताव स्वीकार किए जाने से पहले विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को कम करने के लिए किसी कदम की घोषणा नहीं की है।
स्वराज ने कहा, "एक भी सुधार की घोषणा नहीं की गई है।" इसके विपरीत मुखर्जी ने एक फार्मूल दिया है, "विकास दर बढ़ रही है इसलिए महंगाई बढ़ रही है।"
सदन में इस प्रस्ताव को रखने से पहले स्वराज ने कहा, "सरकार न केवल संवेदनहीन बल्कि वह दुविधा में भी है।"
उन्होंने कहा, "सच्चाई यह है कि विकास दर से किसी और को फायदा हो रहा और महंगाई किसी और को सता रही है। विकास दर और महंगाई का आपस में कोई संबंध नहीं है।"
बहस का जवाब देते हुए मुखर्जी ने कहा कि महंगाई को कम करने के लिए सभी कदम उठाए गए हैं और उठाए जाएंगे, लेकिन जनता को यह समझना चाहिए कि कुछ कारकों जैसे आपूर्ति में कमी और काला बाजारी केंद्र के नियंत्रण से बाहर की चीज है।
उन्होंने कहा कि महंगाई रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना होगा।
जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक उपायों की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा, "राज्यों के पास ताकत है। आवश्यक सेवा रखरखाव कानून राज्यों के पास है। परंतु मेरा इरादा उन पर जिम्मेदारी थोपने का नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए।"
महंगाई पर चर्चा का जवाब देते हुए अपने 50 मिनट के भाषण में मुखर्जी ने हाल में पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतें बढ़ाने के मुद्दे पर कहा कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की वजह से यह आवश्यक था। उन्होंने कहा कि करों में कटौती इसका कोई हल नहीं है।
उन्होंने कहा, "आपको समझना चाहिए कि राज्यों का 34 प्रतिशत राजस्व पेट्रोलियम पदार्थो से आता है। हमें इसका वैकल्पिक उपाय खोजना है। परंतु मैं इससे सहमत हूं कि पेट्रोलियम पदार्थो की कीमत को तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।"
इस संबंध में उन्होंने कहा कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क और राज्यों के अन्य करों के स्थान पर पूरे देश में एक समान वस्तु और सेवा कर अगले वर्ष एक अप्रैल से लागू किए जाने का प्रस्ताव है। इससे संसाधनों में वृद्धि और महंगाई कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इस सत्र में वस्तु और सेवा कर के बारे में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाना चाहिए। अन्यथा इससे और विलंब होगा।
मुखर्जी ने कहा, "कम वस्तुओं की खरीद के लिए अधिक पैसा होने से अपने आप महंगाई बढ़ेगी। परंतु विकास को सुनिश्चित करने के लिए हम जान-बूझकर अर्थव्यवस्था में पैसा डाल रहे हैं।" उन्होंने कहा कि यह निर्यात के साथ ही वस्तुओं के उचित मूल्य के लिए भी जरूरी है।
दालों और खाद्य तेलों के संदर्भ में केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश को दोनों की आपूर्ति के मोर्चे पर झटका झेलना पड़ा है। एक तरफ तो घरेलू उत्पादन घट गया और दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पर्याप्त उपलब्धता की कमी है। उन्होंने उम्मीद जताई की खरीफ की अच्छी फसल से दालों और खाद्य तेल की कीमतें आएंगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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