सीडब्ल्यूजी निर्माण स्थलों पर बाल अधिकारों का घोर हनन : रिपोर्ट
क्राई की यह रिपोर्ट राष्ट्रमंडल खेल आयोजन स्थलों-मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम, आर.के.खन्ना टेनिस स्टेडियम, तालकटोरा स्टेडियम, निजामुद्दीन नाला, लोधी रोड, जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम और सीरी फोर्ट स्टेडियम में जारी निर्माण कार्य से जुटाए गए आंकड़ों पर आधारित है।
क्राई की निदेशक योगिता वर्मा ने कहा, "हमने पाया कि इन निर्माण स्थलों पर बच्चे अस्थाई कैम्पों में रहते हैं। इन्हें स्तरीय भोजन, साफ पानी, स्वच्छता, शिक्षा और यहां तक कि किसी प्रकार का अच्छा माहौल नहीं मिल रहा है। कुल मिलाकर इन बच्चों के बाल अधिकारों का हनन हो रहा है।"
संस्था ने कहा कि निर्माण कार्यो में लगे कामगार दूसरे जगहों से विस्थापित होकर आए हुए हैं। ऐसे में उनके बच्चों में स्कूल छोड़ने की दर काफी अधिक है। सिरी फोर्ट स्टेडियम के कामगारों के बच्चों में से एक भी स्कूल नहीं जाता।
वर्मा ने कहा, "निर्माण स्थलों पर बच्चों के लिए स्वच्छता की कोई व्यवस्था नहीं है। कहीं-कहीं चलित शौचालय हैं लेकिन उनकी ठीक से सफाई नहीं होती। बच्चों का ध्यान रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसके लिए निर्माण स्थलों के करीब कोई आंगनबाड़ी भी नहीं स्थापित की गई है। उनके रहने के स्थानों की हालत दयनीय है। उन्हें प्लास्टिक शीट से बनी झोपड़ियों में रखा गया है।"
रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली उच्च न्ययालय में दाखिल एक जनहित याचिका के माध्यम से यह बात सामने आई है कि राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े कुल 11 आयोजन स्थलों पर 415,000 दैनिक मजदूर काम करते हैं।
वर्मा के मुताबिक यह सब तब हो रहा है जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मई में ही कहा था कि आयोजन स्थलों पर काम करने वाले दैनिक मजदूरों को 'दिल्ली बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स बोर्ड (डीबीसीडब्ल्यूडब्ल्यूबी' के अंतर्गत पंजीकृत किया जाए, जिससे कि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।
न्यायालय के आदेश को नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी), दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) एवं भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के पास भेज दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications