यूएन ने हटाया 45 चरमपंथियों से प्रतिबंध

संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंधित सूची से तालिबान के दस और अल क़ायदा के 35 लोगों के नाम हटा दिए गए हैं. इस सूची में कुल 488 प्रतिबंधित लोगों के नामों की भी समीक्षा की जा रही है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रमुख थॉमस मेयर हार्टिंग ने कहा है कि ये लोग जिस देश के नागरिक थे, उनकी सरकारों की सिफ़ारिश के बाद इन नामों को हटाया गया है. 45 में से 20 नाम उनके हैं जिनके नाम हटाने की अर्ज़ी अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई की तरफ़ से आई थी.
सूची से हटाए गए नामों में से आठ लोग ऐसे हैं जिनकी मौत हो चुकी है.
मेयर हार्टिंग ने कहा कि उन लोगों के नाम हटाने की गुंजाइश बनी रहती है जो हिंसा का रास्ता छोड़कर चरमपंथी संगठनों के साथ अपने संबंध ख़त्म कर देते हैं.
मेयर हार्टिंग ने इस प्रतिबंधित सूची में 443 नामों की समीक्षा की पुष्टि करते हुए बताया है कि इनमें से 132 नाम तालिबान के हैं जबकि 311 नाम उनके हैं जो अल क़ायदा के साथ जुड़े हुए हैं. इनमें से 66 प्रतिबंधित लोगों पर अख़िरी फ़ैसला होना अभी बाक़ी है.
अफ़ग़ानिस्तान की करज़ई सरकार ने तालिबान चरमपंथियों से शांति पर बातचीत के लिए कुछ शर्तें रखी थीं.
सरकार की उनसे मांग थी कि चरमपंथियों को हिंसा का रास्ता छोड़ना होगा, अफ़ग़ानिस्तान का संविधान अपनाना होगा, साथ ही अल क़ायदा से संबंध पूरी तरह से ख़त्म करने होंगे.
जिन लोगों की मौत हो चुकी है उनके नाम हटाने की अर्ज़ी पर मेयर हार्टिंग ने कहा,''उनके नाम सूची से हटाना आसान नहीं है. हमारे पास उनकी मौत के पुख़्ता सबूत होने चाहिए साथ ही हमारे पास उनकी संपत्ति के बारे में पूरी जानकारी होने चाहिए. इसलिए इसमें थोड़ा समय लग सकता है.''
दरअसल संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में शामिल लोगों की संपत्ति ज़ब्त कर ली जाती है और उनके सफ़र करने पर रोक लगा दी जाती है.
उन्हें किसी भी प्रकार के हथियार मुहैया कराना या फिर उनके साथ हथियारों का व्यापार करने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है.












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