खून चढ़ाने से बढ़ सकता है दिल के दौरे का खतरा

हाल ही में हुए अध्ययनों से पता चला है कि शल्य चिकित्सा के दौरान खून चढ़ाने से दिल के दौरे या आघात और निमोनिया या लिम्फ ग्लैंड के कैंसर जैसी बीमारियों से मरीज की मृत्यु होने का खतरा बढ़ जाता है।

समाचार पत्र 'डेली मेल' के मुताबिक यह खतरा जानलेवा वायरसों से संक्रमित रक्त से संबंधित नहीं है। वैज्ञानिकों ने इसके दो संभावित कारण खोजे हैं।

'जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ सर्जन्स' के मुताबिक एक संभावित कारण यह है कि रक्तदान में मिला रक्त एक बीमार व्यक्ति की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने की बजाए उसके रोग प्रतिरोधक तंत्र को बैक्टीरिया व वायरस के हमलों के खिलाफ कमजोर बनाता है।

दूसरा कारण यह है कि खून चढ़ाने से रक्त नलिकाओं में सूजन आ सकती है और शल्य चिकित्सा के बाद दिल का दौरा पड़ सकता है या आघात की समस्या हो सकती है।

ऐसा इसलिए है कि रक्त को 30 दिन तक संरक्षित रखने के दौरान उसमें महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं जो उसे कुछ रक्तग्राहियों के लिए जहरीला बना सकते हैं।

अमेरिका के केंटचुकी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि केवल एक यूनिट खून चढ़ाने से भी 30 दिन के अंदर मरीज की मृत्यु का खतरा 32 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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