प्रधानमंत्री का चुनाव न होने से नेपाल में बेचैनी
काठमांडू, 3 अगस्त (आईएएनएस)। एक माह पहले माधव कुमार नेपाल के प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद नए प्रधानमंत्री के निर्वाचन के लिए संसद के तीन प्रयास विफल होने से नेपाल में बेचैनी बढ़ गई है।
शुक्रवार को नेपाल में प्रधानमंत्री पद के चुनाव का चौथा दौर आयोजित होगा। बड़ी पार्टियों के बीच जारी असहमति के कारण इसमें भी किसी सकारात्मक परिणाम की उम्मीद नहीं दिख रही है।
सोमवार को शाम चार बजे होने वाला प्रधानमंत्री पद का चुनाव पांच घंटे बाद शुरू हुआ। दोनों उम्मीदवारों माओवादी पार्टी के पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' और नेपाली कांग्रेस के रामचंद्र पौडयाल जीत के लिए आवश्यक साधारण बहुमत हासिल करने में विफल रहे।
देश में मजाक का विषय बन चुके प्रधानमंत्री चुनाव ने मई तक नया संविधान बनाने की विफलता और देश को एक संवैधानिक संकट में डालने की याद ताजा कर दी है। एक साधारण संविधान संशोधन से इस समस्या से निकला जा सकता था। फिर भी नेपाल की पार्टियां अंतिम दिन तक इस काम को टालती रहीं।
शुक्रवार को होने वाले चुनाव से भी बहुत कम उम्मीदें हैं। नए प्रधानमंत्री के चुनाव में सांसदों के फिर विफल होने की आशंका है।
संसद की सबसे बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते प्रचंड को अपने प्रतिद्वंद्वी पर बढ़त हासिल है लेकिन आवश्यक 300 सांसदों का आंकड़ा पार करने के लिए उनको अन्य बड़ी पार्टियों के समर्थन की आवश्यकता है।
माओवादियों के 237 सांसदों की तुलना में पौडयाल की पार्टी के 114 सांसद हैं और उनको कम से कम दो बड़ी पार्टियों के समर्थन की जरूरत है।
सोमवार के चुनाव से दिखा कि माओवादी पार्टी ने सत्ता में वापसी के लिए चार क्षेत्रीय पार्टियों के शक्तिशाली गुट में कुछ सेंध लगाई है। इस गुट के 82 सांसद हैं। इस समूह ने मतदान से अनुपस्थित रहने का दावा किया था लेकिन इसके करीब एक दर्जन सांसदों ने प्रचंड के समर्थन में मतदान किया। सोमवार को हुए मतदान में प्रचंड को 259 मत मिले।
इस समूह ने कहा कि वह माओवादी पार्टी से एक समझौते के निकट है। यदि चारों पार्टियों के सभी सांसदों ने प्रचंड के पक्ष में मतदान किया तो वह शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पद पर वापस लौट सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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