ढाका में सैकड़ों फ़ैक्ट्रियों में कामकाज बंद

ढाका में सैकड़ों फ़ैक्ट्रियों में कामकाज बंद
बांग्लादेश पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में मजदूरों के प्रदर्शन के बाद राजधानी ढाका के नज़दीक स्थित कपड़ा बनाने वाली सैकड़ों फ़ैक्ट्रियां लगातार तीसरे दिन बंद है.

इन फ़ैक्ट्रियों के मजदूर लगातार तीन दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. हज़ारों मजदूरों ने मुख्य राजमार्ग को बंद कर दिया. फ़ैक्ट्री मजदूरों और पुलिस के बीच झड़पों की भी ख़बरें मिली हैं. अधिकतर मजदूर संघों ने बीते बृहस्पतिवार को सरकार की ओर से घोषित नई न्यूनतम मजदूरी को अस्वीकार कर दिया है. वे अभी और अधिक वेतन की मांग कर रहे हैं.

कपड़ा निर्माताओं का कहना है कि ऐसा पहली बार है जब विरोध प्रदर्शन की वजह से कपड़ा बनाने वाली सैकड़ों फैक्ट्रियों को बंद करना पड़ा है. ढाका में सड़क मार्ग जाम करके प्रदर्शन कर रहे हज़ारों मजदूरों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने रबड़ की गोलियां चलाई और लाठियां बरसाईं.

पिछले दो दिनों में और अधिक फैक्ट्रियों के मजदूर विरोध प्रदर्शन में शामिल हो चुके हैं. ढाका में कपड़ा निर्यात संघ के उपाध्यक्ष सिद्दीक़र रहमान ने बीबीसी को बताया, "अगर विरोध का यह सिलसिला जारी रहा तो कपड़ा निर्माता पश्चिमी देशों से मिले मौजूदा ऑर्डर को निर्धारित समय पर पूरे नहीं कर पाएंगे. नतीजतन उनको नए ऑर्डर नहीं मिल सकेंगे."

कर्मचारी संघों ने चेतावनी दी है कि जब तक न्यूनतम मजदूरी को 70 डॉलर महीना नहीं कर दिया जाता, वे प्रदर्शन जारी रखेंगे. अभी बीते बृहस्पतिवार को सरकार ने मजदूरों के वेतन में 80 फ़ीसदी की बढ़ोतरी करके 43 डॉलर कर दिया था.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चेतावनी दी है कि मजदूरों की ओर से किए जा रहे तोड़-फोड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी. असल में, मजदूर संघ वेतन को लेकर पिछले कई महीनों से प्रदर्शन कर रहे हैं और ये प्रदर्शन अब हिंसक हो गए हैं.

आख़िरी बार मजदूरों की तनख़्वाह 2006 में बढ़ाई गई थी. कई विदेशी ब्रैंड जैसे वॉलमार्ट, टेस्को, एच एंड एम, मार्क्स एंड स्पेंसर और ज़ारा बांग्लादेश से बनकर आए कपड़े बेचते हैं. कपड़ा उद्योग को बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. देश के कुल निर्यात से होने वाली 80 फ़ीसदी कमाई इसी उद्योग से आती है.

बांग्लादेश में कपड़ा बनाने की चार हज़ार फैक्ट्रियां हैं जिसमें 30 लाख लोगों को रोजगार मिलता है. इनमें अधिकतर महिलाएं हैं. बांग्लादेशी कपड़ा उद्योग पर ये आरोप लगाए गए थे कि फ़ैक्ट्रियों में मजदूरों का शोषण होता है. इसके बाद कई विदेशी कंपनियों ने बांग्लादेश सरकार से कहा था कि वो मजदूरों का न्यूनतम वेतन बढ़ाए.

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