रेलवे नक्सलियों का आसान निशाना : मंत्री

नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। रेल राज्य मंत्री ई. अहमद ने शुक्रवार को राज्यसभा में कहा कि रेलवे नक्सलियों के लिए एक आसान निशाना बन गई है।

उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ के कारण रेल हादसों में काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2008 की छह और 2009 की तीन रेल दुर्घटनाओं के मुकाबले तोड़फोड़ के चलते इस साल के पहले छह महीनों के भीतर आठ दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।

अहमद ने कहा, "हाल के दिनों में देश में सुरक्षा परिदृश्य बहुत तेजी से बदला है। रेलवे की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचनाओं पर नक्सलियों के हमलों में वृद्धि हुई है।"

एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा, "अपने विशाल नेटवर्क और फैलाव के कारण रेलवे नक्सलियों का आसान निशाना बन गया है।"

'रेलवे की पुलिस व्यवस्था' को राज्य की जिम्मेदारी बताते हुए अहमद ने कहा कि रेलवे में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के अलावा अपराधों की रोकथाम, आपराधिक मामले दर्ज करना, उनकी जांच की वैधानिक जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की है।

अहमद ने कहा, "रेलवे में अपराध रोकने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) का पूरक बन रहा है। "

रेलवे में सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाए गए विभिन्न कदमों के बारे में उन्होंने कहा कि नक्सल-प्रभावित इलाकों में सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील ट्रेनों के लिए पुलिस एस्कॉर्ट मुहैया कराने का निर्णय लिया गया है।

रेलवे पर हमले से बचाव के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल सरकारों से ट्रेनों में नागरिक पुलिसकर्मियों, जीआरपी और केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती के लिए कहा है।

अहमद ने कहा, "संवेदनशील रेलवे स्टेशनों पर निगरानी तंत्र बढ़ाने के लिए 353 करोड़ रुपये की लागत वाली एक एकीकृत सुरक्षा प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है।"

उन्होंने बताया कि पहले चरण में इसे 202 संवेदनशील रेलवे स्टेशनों पर लागू किया जाएगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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