मध्य प्रदेश में सत्तापक्ष के विधायकों का अंदाज विद्रोही

विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस के साथ भाजपा के विधायक भी आक्रामक मुद्रा में हैं और वे सरकार के खिलाफ सवाल उठाने में पीछे नहीं हैं। विधानसभा के मानसून सत्र की आठ बैठकों में कम से कम छह ऐसे अवसर आए हैं, जब भाजपा विधायकों ने सरकार को घेरा है और कांग्रेस विधायकों ने इसका भरपूर लाभ लेने की कोशिश की है। यही कारण है कि मंगलवार को भाजपा विधायकों की बैठक में संगठन मंत्री माखन सिंह को कहना पड़ा था कि विधायक विधानसभा में ऐसे सवाल करने से बचें, जिससे सरकार की नाकामी उजागर होती हो। मजे की बात यह है कि पार्टी नेता की हिदायत का विधायकों पर चंद घंटे भी असर नहीं रहा।

बुधवार को भाजपा विधायक विश्वास सारंग ने प्रदेश के विभिन्न शहरों मे एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली संस्था जीवीकेई एमआरई पर करोड़ों रुपये की गड़बड़ी का आरोप लगाकर सरकार को मुश्किल में डाल दिया। उनका आरेाप था कि संस्था द्वारा संचालित एंबुलेंस सेवा में तमाम गड़बड़ियां हैं और एक्सपायरी डेट की दवाओं का उपयोग किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सारंग द्वारा पूर्व में योजना की सराहना करने के दस्तावेज को स्वास्थ्य राज्यमंत्री महेंद्र हार्डिया ने पढ़कर बहस को और गरमा दिया।

इसके अलावा जबलपुर के विधायक मोती कश्यप ने अप्रैल 2010 में एक व्यक्ति की शराब ठेकेदार के साथियों द्वारा की गई हत्या और पुलिस द्वारा कार्रवाई में लापरवाही का मामला उठाया। उनका आरोप था कि इस मामले में उनकी बहन भी पीड़ित पक्ष में शामिल है। उसके बाद भी पुलिस आरोपियों का साथ दे रही है। उनका कहना था कि जब उनके साथ ऐसा हो रहा है तो औरों के साथ क्या होता होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। इस मामले में कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह ने भी कश्यप का साथ दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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