आयोग करेगा भोपाल गैस त्रासदी की जांच : शिवराज (लीड-1)
विधानसभा में कांग्रेस द्वारा गैस त्रासदी को लेकर लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान चौहान ने सोमवार को कहा कि हादसे के बाद तत्कालीन प्रदेश सरकार ने हादसे की जांच के लिए एन.के. सिंह की अध्यक्षता में एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था। इस आयोग को सात बिंदुओं पर जांच करनी थी, मगर केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल की राजनीतिक मामलों की समिति की सिफारिश पर आयोग को एक साल बाद ही खत्म कर दिया गया था।
उनका आरोप है कि तत्कालीन केंद्र सरकार नहीं चाहती थी कि हादसे के कारणों और दोषियों का खुलासा हो। यही कारण था कि आयोग को एक साल बाद ही भंग कर दिया गया। इतना ही नहीं, आयोग ने एक साल के भीतर क्या किया, इसका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।
चौहान ने आयोग को खत्म करने के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव के.सी.एस. आचार्य द्वारा लिखी गई नोटशीट को भी विधानसभा में पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब नए आयोग का गठन करेगा जो हादसा कैसे हुआ, सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और इसके लिए कौन जिम्मेदार है आदि मामलों की जांच करेगा। उनकी कोशिश है कि दोषियों को सजा और पीड़ितों को न्याय मिले।
चौहान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से एक बार फिर अनुरोध किया कि वे उनका नाम बताएं जिनके दबाव में उन्होंने हादसे के मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन को भोपाल और देश से भाग जाने दिया।
चौहान ने आगे कहा कि दो-तीन दिसंबर, 1984 की रात हादसा अचानक नहीं हुआ था, बल्कि उसके पहले भी कई हादसे हो चुके थे। उनका आरोप है कि तत्कालीन सरकार छोटे हादसों को लेकर गंभीर होती तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री और उनसे जुड़े लोग यूनियन कार्बाइड कंपनी से उपकृत थे, लिहाजा उन्होंने हर बार कंपनी का ही साथ दिया।
चौहान ने आरोपियों पर दर्ज किए गए मामले की धाराओं में तब्दीली किए जाने के लिए भी केंद्र सरकार के रवैए को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जब न्यायालय ने धाराओं में बदलाव किया था तब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को न्यायालय का सहारा लेना चाहिए था।
उन्होंने घोषणा की है कि प्रदेश सरकार हादसे के चलते विधवा हुईं महिलाओं को 500 रुपये का पेंशन प्रतिमाह देगी। साथ ही पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे में इजाफा करने की लड़ाई लड़ेगी। जो पीड़ित मुआवजे से वंचित रह गए हैं उन्हें भी मुआवजा मिले, इसके लिए प्रयास होंगे।
चौहान ने भरोसा दिलाया है कि यूनियन कार्बाइड कारखाने में जमा अवशिष्ट को नष्ट करने से किसी को नुकसान न हो, सरकार इसका भी ध्यान रखेगी। पीतमपुर में कचरा नष्ट करने से होने वाले नुकसान की आशंकाओं पर भी सरकार का ध्यान है। वहां जबरदस्ती कचरा नहीं जलाया जाएगा।
स्थगन पर कांग्रेस की ओर से उपनेता चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी, आरिफ अकील, महेंद्र सिंह कालूखेड़ा, कल्पना पारूलेकर, भाजपा की ओर से मंत्री बाबूलाल गौर, अजय विश्नोई, विधायक विश्वास सारंग और भारतीय जनशक्ति पार्टी के अजय यादव ने हिस्सा लिया। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों में कई बार तीखी नोकझोंक हुई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications