अमित शाह गए जेल, सीबीआई ने नहीं मांगी रिमांड (राउंडअप)

आधिकारिक सूत्र ने बताया, "अमित शाह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।"

गिरफ्तारी के बाद शाह को सीबीआई के न्यायाधीश ए.वाई. दवे के आवास पर पेश किया गया। दवे ने शाह को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, क्योंकि सीबीआई ने शाह के रिमांड के लिए अर्जी ही नहीं दी। सीबीआई के इस कदम से लोग चकित रह गए, क्योंकि यही सीबीआई इसके पहले शाह से पूछताछ के लिए उत्सुक थी।

शाह को साबरमती जेल ले जाया गया और वहां उन्हें सरदार पटेल बैरक में कैद कर दिया गया। इस बैरक में कभी महात्मा गांधी और सरदार पटेल को रखा गया था। जेल अधिकारी ने कहा कि शाह अपने कपड़े पहनेंगे और घर का खाना खाएंगे। लेकिन इस बात के सख्त निर्देश दिए गए हैं कि शाह को इसी मामले के अन्य 15 अन्य आरोपियों से मिलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जो कि उसी जेल में कैद हैं।

गुरुवार से लापता चल रहे शाह रविवार सुबह अहमदाबाद में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यालय में मीडिया के सामने आए। उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उन पर लगाए गए आरोप गलत हैं।

संवाददाता सम्मेलन को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आर. सी. फर्दू संबोधित कर रहे थे।

शाह ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप गलत, मनगढं़त और राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के निर्देश पर सीबीआई ने उनके खिलाफ आरोप-पत्र तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में नरेंद्र मोदी की सरकार से 'निपटने' के लिए केंद्र सरकार ऐसा कर रही है।

उन्होंने कहा कि सीबीआई के समक्ष उनके उपस्थित नहीं होने के एक दिन के भीतर एजेंसी ने 30 हजार पृष्ठों का आरोप पत्र दाखिल किया। इसका मतलब यह है कि 'सीबीआई द्वारा जारी सम्मन का आरोप पत्र से कोई लेना देना नहीं था।'

शाह ने कहा कि सम्मन में कहा गया था कि उन्होंने कथित तौर पर धमकी दी थी लेकिन आरोप पत्र में उन्हें हत्या का आरोपी बनाया गया है।

शाह ने सीबीआई को दिए जाने वाले अपने बयान की वीडियो रिकार्डिग कराने और उसे आवश्यकता होने पर न्यायालय में पेश किए जाने की मांग की।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि न्यायपालिक में उनका पूरा भरोसा है और उनके लिए सभी कानूनी रास्ते खुले हैं।

उन्होंने कहा, "मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि यह कांग्रेस का षड्यंत्र है और गुजरात में सत्ता में आने के लिए वह सत्ता का दुरुपयोग कर रही है।"

उन्होंने दावा किया कि सोहराबुद्दीन आतंकवादी था, जो राष्ट्र के खिलाफ षड्यंत्र रचने में शामिल था। कांग्रेस उसे एक तुच्छ अपराधी करार देती है लेकिन गुजरात पुलिस ने उसके घर से एके 46 और 47 राइफलें, 100 हथगोले और एक लाख गोलियां बरामद की थीं।

शाह ने मीडिया को तथ्यों की पड़ताल के बाद रिपोर्टिग करने की सलाह देते हुए कहा कि जिन पुलिसकर्मियों को फर्जी मुठभेड़ का आरोपी बनाकर जेल भेजा गया है, उन्होंने आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करीब 400 लोगों को पकड़कर जेल भेजा है। मीडिया ने इस तथ्य की अनदेखी की।

इधर नई दिल्ली में भाजपा ने कहा कि अमित शाह कानून से बंधे हुए हैं।

पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "उन्हें आरोप पत्र की प्रति प्राप्त नहीं हुई, लेकिन उन्होंने इस्तीफा दे दिया।"

जावड़ेकर ने कहा, "नियमों के मुताबिक किसी व्यक्ति को सम्मन मिलता है तो उसे अपने बदले वकील को भेजने का अधिकार है..उन्होंने कानून का पालन किया है।"

जावड़ेकर ने यह भी कहा कि अहमदाबाद में शाह के संवाददाता सम्मेलन में आने के पीछे कोई नाटक नहीं था।

जावड़ेकर ने एक बार फिर कांग्रेस पर विरोधियों के खिलाफ सीबीआई के इस्तेमाल का आरोप लगाया।

दूसरी ओर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इस आरोप के जवाब में कहा कि सीबीआई द्वारा गुजरात के पूर्व गृह राज्य मंत्री अमित शाह को मुख्य आरोपी बनाए जाने से कांग्रेस का कुछ भी लेना-देना नहीं है।

लखनऊ में रविवार को कांग्रेस के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए सिब्बल ने कहा कि अमित शाह को कांग्रेस ने अभियुक्त नहीं बनाया, बल्कि सीबीआई ने उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसलिए कांग्रेस पार्टी का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है।

सिब्बल ने कहा कि यह कहना सरासर गलत है कि सीबीआई ने कांग्रेस के इशारे पर ऐसा किया है। सीबीआई देश की स्वतंत्र जांच एजेंसी है। उसने शाह को सम्मन जारी किया, उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया और उन्हें आरोपी बनाया।

भाजपा द्वारा यह आरोप लगाए जाने के सवाल पर कि शाह के खिलाफ आरोप पत्र पहले से तैयार कर लिया गया था, सिब्बल ने कहा कि हम सरकार के हिस्से हैं, लेकिन हमें इस बारे में कुछ नहीं पता। लेकिन सरकार के बाहर रह कर भाजपा को सब कुछ पता है।

इसके अलावा कांग्रेस ने यह भी कहा कि भाजपा और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व अमित शाह को बलि का बकरा बना रहे हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता शकील अहमद ने आईएएनएस को बताया, "अमित शाह और मोदी का यह कहना कि सीबीआई को राजनीतिक औजार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, बचाव की एक तर्कहीन प्रक्रिया है। अंततोगत्वा अदालत निश्चित सवाल पूछेगी और जांच का दायरा मोदी की ओर बढ़ेगा। अमित शाह को तो बलि का बकरा बनाया जा रहा है।"

कांग्रेस के एक अन्य प्रवक्ता मनीष तिवारी ने समाचार चैनल, टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में अमित शाह और भाजपा पर आरोप लगाया कि दोनों ने राज्य की ओर से दाखिल हलफनामे को पढ़ा नहीं है। तिवारी ने कहा, "दोनों को वर्ष 2007 में पुलिस महानिरीक्षक गीता जौहरी द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे को पहले पढ़ लेना चाहिए, फिर जुबान खोलनी चाहिए। फरारी के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी देने के बदले जांच करने वाली एजेंसी के बचाव में क्यों न बोला जाए?"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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