बिजली पर सब्सिडी से ऊर्जा क्षेत्र प्रभावित : प्रधानमंत्री

विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय विकास परिषद की 55वीं बैठक में सिंह ने कहा, "वर्ष 2009-10 में ऊर्जा क्षेत्र में कुल 40,000 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान है। यह स्थिति लंबे समय तक नहीं चल सकती है और यदि इसे सुधारा नहीं गया तो यह पूरे ऊर्जा क्षेत्र को अनुपयुक्त बना देगा।"

बैठक में केंद्रीय मंत्रिमंडल के महत्वपूर्ण सदस्यों के अलावा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी शामिल थे।

सिंचाई के लिए भारी सब्सिडी पर बिजली पा रहे किसानों का उल्लेख किए बगैर सिंह ने कहा, "कुछ श्रेणियों के उपभोक्ताओं को कम कीमत पर बिजली देने से यह घाटा पैदा होता है। इसके साथ भारी तकनीकी और वाणिज्यिक घाटा जुड़ा है।"

अहलूवालिया ने एक दिन पहले किसानों को मुफ्त बिजली देने के लोकप्रिय उपायों को खारिज करते हुए कहा था कि मुफ्त बिजली के कारण कुछ इलाकों में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है।

राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक की पूर्व संध्या पर अहलूवालिया ने संवाददाताओं से कहा था कि किसानों को मुफ्त बिजली देने का फैसला राजनीतिक जरूरत भले हो लेकिन यह किसानों की मदद करने का सबसे बेहतर तरीका नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा, "यदि हम नौ प्रतिशत की वृद्धि हासिल करना चाहते हैं तो ऊर्जा क्षेत्र विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मध्यकालिक समीक्षा के अनुसार 10वीं पंचवर्षीय योजना से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है। 11वीं पंचवर्षीय योजना में 62,000-64,000 मेगावॉट बिजली निर्माण क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।"

उन्होंने कहा कि यह 11वीं योजना में उत्पादन तय 78,000 मेगावॉट क्षमता के लक्ष्य से कम है फिर भी इस दौरान 10वीं योजना से तीन गुना अधिक बिजली निर्माण क्षमता का विकास होगा।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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