आईएसआई को रणनीतिक नजरिया बदलने की जरूरत : अमेरिका (लीड-1)

भारत दौरे पर आए अमेरिका के सर्वोच्च सैन्य कमांडर, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी, एडमिरल माइकल मुलेन ने कहा, "मैं मानता हूं कि आईएसआई के रणनीतिक नजरिए में बुनियादी तौर पर बदलाव की जरूरत है। इस सुरक्षा संबंधी चिंता को मैंने कई बार उठाया है। आईएसआई के बारे में बहुत सारी बातें हैं, जिसे मैं जानता हूं और उसके बारे में बहुत सारी बातें ऐसी भी हैं, जिसे मैं नहीं जानता।"

आईएसआई के बारे में मुलेन की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब एक दिन पहले अफगानिस्तान एवं पाकिस्तान के विशेष अमेरिकी दूत रिचर्ड हॉलब्रुक ने आईएसआई और तालिबान के बीच संबंध को एक समस्या बताई थी।

मुलेन भारतीय अधिकारियों के साथ श्रृंखलाबद्ध मुलाकातों के बाद यहां संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे। मुलेन ने रक्षा मंत्री ए.के.एंटनी से भी मुलाकात की।

मुलेन से मुलाकात के दौरान एंटनी ने पाकिस्तान को दिए जा रहे अमेरिकी सैन्य सहायता को लेकर भारत की चिंताओं से अवगत कराया।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एंटनी ने अमेरिका से कहा कि वह इस बात की निगरानी के लिए एक प्रक्रिया विकसित करे, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पाकिस्तान अमेरिकी सैन्य सहायता का इस्तेमाल आतंक के खिलाफ युद्ध के लिए करे, न कि भारत के खिलाफ।

बैठक में उपस्थित एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "एंटनी ने मुलेन को अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य सहायता पर भारत की चिंता से अवगत कराया और कहा कि इसे केवल आतंक के खिलाफ लड़ाई में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पाकिस्तान को दी जा रही सहायता जरूरत से अधिक है और आतंक से लड़ाई के लिए जरूरी मात्रा से अधिक है।"

मुलेन ने कहा कि सैन्य सहायता दोनों देशों के बीच सैन्य संतुलन बिगाड़ने के लिए नहीं है।

इसके एक दिन पहले मुंबई हमले जैसे एक और हमले की चेतावनी देते हुए मुलेन ने अपने साथ यात्रा कर रहे संवाददाताओं को बताया था कि वह इस बात से चिंतित हैं कि पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) एक बड़े क्षेत्रीय और वैश्विक खतरे के रूप में उभर रहा है। मुलेन इन दिनों भारत दौरे पर हैं।

इस बीच नई दिल्ली ने अमेरिका के साथ एक आतंक निरोधी समझौते पर हस्ताक्षर किया और आतंकी जांच से लेकर साइबर व सीमा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ाने का संकल्प लिया।

आतंक निरोधी सहयोग को कार्यान्वित करने के लिए आपसी समझौते (एमओयू) को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अमेरिका दौरे (नवंबर 2008) के दौरान मूर्त रूप दिया गया था। अब इस समझौते पर भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी जे.रोमर और केंद्रीय गृह सचिव जी.के.पिल्लै ने हस्ताक्षर किया।

रोमर ने कहा, "यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच आतंक निरोध, सूचना का आदान-प्रदान और क्षमता विकास पर घनिष्ठ और प्रभावी सहयोग का ताजा सबूत है।"

इस पहल के तहत आतंक से मुकाबले के लिए सहयोग बढ़ाने के खास क्षेत्रों की पहचान की गई है। इसमें परिवहन सुरक्षा, सीमा सुरक्षा, आर्थिक घपलेबाजी व आतंक वित्तपोषण और बड़े शहरों में पुलिस बंदोबस्त व्यवस्थित करने जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

रोमर ने कहा, "आने वाले दिनों और महीनों में बम विस्फोट जांचों और प्रमुख आयोजनों की सुरक्षा से लेकर बड़े शहरों में पुलिस बंदोबस्त जैसे मुद्दों पर भी सूचनाओं का आदान-प्रदान और सामूहिक प्रयास देखने को मिलेंगे।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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