घायल का इलाज न करने वाले डाक्टर पर जुर्माना
नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। गंभीर रूप से घायल एक सिपाही का इलाज न करने और उसे मरने के लिए छोड़ देने वाले दिल्ली के एक डॉक्टर को एक उपभोक्ता अदालत ने पीड़ित के परिवार को तीन लाख रुपये का जुर्माना देने को कहा है। दो साल पहले इस डॉक्टर के दवाखाने के बाहर उक्त सिपाही ने इलाज न हो पाने की वजह से दम तोड़ दिया था।
दिल्ली राज्य उपभोक्ता निवारण आयोग ने अपने हाल के आदेश में भारतीय चिकित्सा परिषद से भी पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी क्षेत्र में अपना चिकित्सालय चला रहे डॉ. ए.के. मिनोचा के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए कहा है।
न्यायाधीश बरकत अली जैदी की अध्यक्षता में आयोग ने कहा, "केवल सरकारी डॉक्टर ही मरते हुए व्यक्ति की मदद करने के लिए बाध्य नहीं हैं। प्रत्येक डॉक्टर एक चिकित्सा शपथ से बंधा होता है और उसे गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद जरूर करनी चाहिए।"
दो साल पहले मिनोचा चिकित्सालय के बाहर नायक सूबेदार के.एल. गुलयानी की मौत हो गई थी। गुलयानी बस में यात्रा कर रहे थे तभी चोरों के एक समूह ने उन पर हमला कर दिया। वह बस से उतरे और घर जाने की कोशिश की लेकिन दवाखाने के सामने ही उनकी मौत हो गई।
मिनोचा बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने अपने चिकित्सालय से बाहर आकर गुलयानी को घायल अवस्था में पड़े देखा लेकिन वह उन्हें ऐसा ही पड़ा छोड़कर वापस अपने मरीजों को देखने के लिए चले गए। बाद में एक पति-पत्नी उस चिकित्सालय में आए और उन्होंने गुलयानी की मदद करने की कोशिश की।
वे नजदीक के ऑर्किड अस्पताल से स्ट्रेचर लाए और गुलयानी को उस पर अस्पताल ले गए लेकिन वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
गुलयानी की पत्नी सविता ने मरते हुए व्यक्ति की मदद न करने के आरोप में ऑर्किड अस्पताल और मिनोचा के खिलाफ जिला फोरम में मामला दर्ज किया।
इसके बाद जिला फोरम ने 2008 में गुलयानी परिवार को आठ लाख रुपये का हर्जाना मिलने का फैसला सुनाया। इनमें से पांच लाख रुपये अस्पताल को और तीन लाख रुपये डॉक्टर को देने थे।
अस्पताल और डॉक्टर ने इस आदेश के खिलाफ राज्य आयोग में अपील की। वहां अस्पताल को तो आरोप मुक्त कर दिया गया लेकिन मिनोचा के लिए तीन लाख रुपये का जुर्माना बरकरार रखा गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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