दो दशकों में उल्फा और सरकार के बीच पहली सीधी बातचीत

सैयद जरीर हुसैन

गुवाहाटी, 23 जुलाई (आईएएनएस)। असम में शुक्रवार को केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के साथ पहले दौर की बातचीत शुरू कर नया इतिहास रचा। इससे पहले वर्ष 1992 में उल्फा के साथ औपचारिक बातचीत हुई थी।

केंद्र सरकार की ओर से नियुक्त नए शांति वार्ताकार पी.सी. हालदार ने आईएएनएस को बताया, "हमने उल्फा नेताओं से सुबह जेल में मुलाकात की। यह उनसे मेरी पहली भेंट थी। मेरे लिए यह काम बर्फ को तोड़ने जैसा था।"

उन्होंने बताया कि गुवाहाटी केंद्रीय कारागार में उल्फा के बंदी अध्यक्ष अरविंद राजखोवा के साथ उनकी बातचीत घंटा भर चली।

बैठक में अन्य उल्फा नेताओं में स्वयंभू विदेश सचिव साशा चौधरी, वित्त सचिव चित्रबोन हजारिका, सांस्कृतिक सचिव प्रणति डेका और राजनीतिक सलाहकार भीमकांत बुरागोहैन शामिल थे।

हालदार ने बताया, "मैं मानता हूं कि बैठक अच्छी और सकारात्मक रही।"

उल्लेखनीय है कि उल्फा के कमांडर इन चीफ परेश बरुआ बांग्लादेश में शरण लिए हुए हैं और संगठन के सभी शीर्ष नेता इस समय जेल में बंद हैं।

उल्फा के साथ पहली बार वार्ता 11 जनवरी, 1992 को नई दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने शुरू की थी। उल्फा के महासचिव अनूप चेतिया अब बांग्लादेश की जेल में हैं। पूर्व प्रचार प्रमुख सुनील नाथ एवं तीन अन्य उग्रपंथी नेताओं को प्रधानमंत्री से मिलवाने के लिए उस समय विमान से लाया गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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