सोहराबुद्दीन मामला : शाह की अर्जी खारिज, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने (राउंडअप)

इस बीच शुक्रवार को ही सीबीआई ने पूर्व पुलिस उप आयुक्त अभय चौदास्मा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप पत्र में आरोपियों की सूची में अमित शाह का नाम भी शामिल है। उधर सीबीआई की एक विशेष अदालत ने शाह की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।

सीबीआई द्वारा सम्मन जारी किए जाने के बावजूद शाह दूसरे दिन भी पूछताछ के लिए सीबीआई के समक्ष पेश नहीं हुए थे। इससे पहले गुरुवार को शाह और उनके वकील महेश जेठमलानी ने सीबीआई के सामने पेश होने का बयान दिया था।

सीबीआई ने शाह को पेश होने के लिए शुक्रवार दोपहर एक बजे तक की मोहलत दी थी, लेकिन शाह ने सीबीआई के विशेष न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। न्यायालय ने शुक्रवार दोपहर बाद अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी।

शुक्रवार को सीबीआई के समक्ष खुद हाजिर होने की बजाय शाह ने अपने वकील मितेश अमीन को भेजा था। अमीन ने प्रश्नावली मांगी लेकिन सीबीआई ने उन्हें इसे देने से इंकार कर दिया।

शाह पर हत्या और आपराधिक षडयंत्र रचने का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसी ने शाह के पूछताछ के लिए उसके समक्ष पेश न होने के बाद चौदास्मा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने का कदम उठाया। इस आरोप पत्र में 18 आरोपियों का नाम शामिल किया गया है जिनमें से 15 पहले से ही जेल में हैं, जेल से बाहर के तीन लोगों में ही कथित रूप से अमित शाह का नाम शामिल है।

इधर, भाजपा ने इस मामले में केंद्र सरकार पर सीबीआई का दुरुपयोग करने का आरोप लगाते हुए शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ओर से दिए गए दोपहर के भोज के निमंत्रण को ठुकरा दिया।

पार्टी मुख्यालय पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया, "इसी महीने की 19 तारीख को केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने हमें दोपहर के भोज पर बुलाया था। इसमें मैं, आडवाणी जी (लालकृष्ण आडवाणी) और अरुण जेटली गए थे। इसी तरह प्रधानमंत्री की ओर से भी आज (शुक्रवार) दोपहर के भोज का निमंत्रण मिला था। इसमें आडवाणी जी, जेटली, मुझे और हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी को शामिल होना था।"

सुषमा ने कहा, "आप सभी जानते हैं कि हमने पहले भी केंद्र सरकार द्वारा सीबीआई का दुरुपयोग करने की बात कही है। गुजरात में भी सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है। सीबीआई के इसी दुरुपयोग के विरोध में हमने प्रधानमंत्री की ओर से दिए भोज पर न जाने का फैसला किया है।"

इस बीच कांग्रेस ने भाजपा पर सोहराबुद्दीन शेख मामले में जांच को प्रभावित करने के प्रयास का आरोप लगाया है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अमित शाह का नाम इस मामले में आने के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस मसले पर संवाददाता सम्मेलन करना गैर जिम्मेदाराना हरकत है।

"सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस मामले की जांच के आदेश देने के बाद भाजपा द्वारा इस प्रकार की प्रतिक्रिया देना उसकी बौखलाहट का नतीजा है।..यह सस्ती राजनीति है।"

उल्लेखनीय है कि गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार दिया था। उसकी पत्नी कौसर बी तभी से लापता है। राज्य पुलिस का दावा है कि सोहराबुद्दीन लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी था।

इस वर्ष 12 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने इस 'मुठभेड़' में शामिल गुजरात और राजस्थान के पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। इस मामले में 15 पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।

इस पूरे मामले में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि गुजरात के मंत्री अमित शाह को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

माकपा महासचिव प्रकाश करात ने कहा, "सीबीआई जांच को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।" उन्होंने कहा, "जांच से शाह की संलिप्तता के सबूत मिले हैं। गुजरात सरकार के सांप्रदायिक नरसंहार के इतिहास के मद्देनजर इस जांच को जारी रखा जाना चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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