बांध विवाद पर प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करेगा आंध्र प्रदेश
मुख्यमंत्री के.रोसैया की अध्यक्षता में संपन्न हुई एक सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री को 26 जुलाई को एक ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया। ज्ञापन में उनसे आग्रह किया जाएगा कि वह निचले राज्यों, खासतौर से आंध्र प्रदेश के हितों की रक्षा करें।
बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए सिंचाई मंत्री, पोन्नला लक्ष्मैया ने कहा कि बैठक में प्रधानमंत्री को इस बात से अवगत कराने का निर्णय लिया गया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा नदी जल बंटवारे पर हुए समझौते का उल्लंघन कर बांध का निर्माण किया जा रहा है, जो आंध्र प्रदेश के हितों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
लक्ष्मैया ने कहा कि प्रधानमंत्री से आग्रह किया जाएगा कि वह समस्या का कोई स्थाई समाधान सुझाएं और यह सुनिश्चित कराएं कि ऊपरी राज्य ऐसे कदम न उठाएं जो निचले राज्यों के हितों के लिए लिए नुकसानदेह साबित हो।
प्रधानमंत्री से मिलने एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली जाएगा।
सरकार की ओर से एक पार्टी से केवल एक प्रतिनिधि को ही बैठक में शामिल होने की अनुमति थी। सरकार के इस निर्णय के विरोध में मुख्य विपक्ष, तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया। तेदेपा नेता मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंप कर बाहर आ गए।
तेदेपा ने मांग की कि महाराष्ट्र को गोदावरी नदी पर अनधिकृत तरीके से निर्मित किए जा रहे बाभली बांध और अन्य 13 परियोजनाओं को रोक देना चाहिए।
बैठक में कांग्रेस, प्रजा राज्यम पार्टी (पीआरपी), तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस), मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमीन (एमआईएम), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और लोक सत्ता ने हिस्सा लिया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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