सलाहकार परिषद ने सख्त मौद्रिक नीति का समर्थन किया (लीड-2)
परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा, "मौद्रिक नीति को अब दूसरे देशों में अपनाए जा रहे उदार रुख से अलग रास्ता अपनाना होगा। बढ़ती मांग पर नियंत्रण के लिए कुछ सख्ती दिखाई जानी चाहिए।"
उन्होंने कहा वर्ष 2009-10 में थोक मूल्य सूचकांक में लगातार वृद्धि और खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी के चलते देश में महंगाई काफी ऊंचे स्तर पर बनी रही है। उन्होंने कहा, "भारतीय मौद्रिक नीति में अर्थव्यवस्था के इस महत्वपूर्ण पहलू को ध्यान में रखा जाना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि राहत पैकेज वापस लेने की प्रक्रिया मौद्रिक नीति के जरिए पूर्ण होगी।
परिषद ने अनुमान लगाया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की धीमी रफ्तार के बावजूद चालू वित्त वर्ष में देश की विकास दर 8.5 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष में 9 प्रतिशत रहेगी।
परिषद ने कहा कि दिसंबर तक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर घटकर 7-8 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच जाएगी। मार्च तक इसके 6.5 प्रतिशत पर पहुंचने की आशा है। जून महीने में महंगाई दर 10.5 प्रतिशत रही।
भारतीय रिजर्व बैंक 27 जुलाई को मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा करेगा। इससे पहले 2 जून को बैंक रेपो और रिवर्स रेपो दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर चुका है। माना जा रहा है कि 27 जुलाई की समीक्षा में प्रमुख दरों में और वृद्धि हो सकती है।
परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने कहा, "हमारा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की विकास दर 4.5 प्रतिशत, औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि की दर 9.7 प्रतिशत और सेवाओं की विकास दर 8.9 प्रतिशत रहेगी। इस साल सभी क्षेत्रों की विकास दर 8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।"
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "सामान्य मानसून के अनुमान के चलते कृषि क्षेत्र की विकास दर पिछले साल के 0.2 प्रतिशत से बढ़कर इस साल 4.5 प्रतिशत रहेगी।"
वर्ष 2009-10 में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि इससे पूर्व 2008-09 में इसमें 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इससे पहले के तीन सालों में देश की विकास दर क्रमश: 9.2 प्रतिशत, 9.7 प्रतिशत और 9.5 प्रतिशत रही थी।
परिषद ने कहा कि पूंजी प्रवाह बढ़ने से चालू खाता घाटे और राजकोषीय घाटे में कमी होगी। मौजूदा वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा जीडीपी का 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि खाद्य और खाद सब्सिडी तर्कसंगत बनाना और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू करना प्राथमिकता में रखा जाए।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय विकास परिषद द्वारा ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना की मध्यावधि समीक्षा से एक दिन पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष ने यह अनुमान जताया है।
इससे पहले राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक आयोजित करने जा रहे योजना आयोग ने पहले ही स्वीकार किया है कि ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना में कृषि क्षेत्र में चार प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकेगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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