सोहराबुद्दीन मामला : पेश नहीं हुए शाह, सीबीआई ने भेजा दूसरा नोटिस (लीड-3)
शाह को गुरुवार एक बजे तक सीबीआई के समक्ष पेश होने को कहा गया था लेकिन आज वह एक बजे तक सीबीआई के समक्ष हाजिर नहीं हुए। इससे पहले, राज्य सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता और गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री जयनारायण व्यास ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। इससे संकेत मिला था कि शाह गुरुवार को सीबीआई के समक्ष पेश होंगे।
सीबीआई ने उन्हें दूसरा सम्मन भेजते हुए शुक्रवार एक बजे तक पेश होने को कहा है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले शाह को अपने सामने पेश करने के लिए सीबीआई पिछले तीन दिनों से प्रयासरत थी। अंत में सम्मन की एक प्रति उनके आवास के बाहर लगा दी गई और दूसरी उनके कार्यालय में भेजी गई।
शाह पर शेख की हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों को फोन करने का आरोप है। पुलिस का दावा है कि सोहराबुद्दीन लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी था। सूत्रों ने कहा कि सीबीआई ने फर्जी मुठभेड़ मामले में मंत्री की भूमिका को साबित करने के लिए फोन रिकार्ड एकत्र किए हैं।
गुजरात के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने सोहराबुद्दीन को 26 नवंबर 2005 को एक कथित फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया था। उसकी पत्नी कौसर बी तभी से लापता है।
इस वर्ष 12 जनवरी को सर्वोच्च न्यायालय ने कथित फर्जी मुठभेड़ में शामिल गुजरात और राजस्थान के पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया। इस संबंध में एक फरवरी को मामला दर्ज किया गया। अब तक इस मामले में 15 पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
सीबीआई द्वारा शाह को समन भेजे जाने का स्वागत करते हुए सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन शेख ने कहा कि सीबीआई जांच सही दिशा में जा रही है। रुबाबुद्दीन ही इस मामले में कानूनी जंग लड़ रहा है।
रुबाबुद्दीन ने मध्य प्रदेश के उज्जैन से आईएएनएस से फोन पर बातचीत में कहा, "हमें न्याय की उम्मीद है क्योंकि सीबीआई जांच सही दिशा में जा रही है। मैं सीबीआई अधिकारियों के लगातार संपर्क में हूं। देखें क्या होता है।"
उन्होंने कहा, "तुलसी प्रजापति ने राज्य के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) को दिए बयान में मेरे भाई की हत्या में शाह की भूमिका के बारे में बताया था लेकिन उन्होंने इसे तव्वजो नहीं दी।" प्रजापति इस मामले में एक प्रमुख गवाह है।
कांग्रेस ने शाह को भेजे गए सम्मन के मद्देनजर उनके इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा, "यह मामला आरोपी, जांच एजेंसी और अदालत के बीच का है। हम बस यह चाहते हैं कि मामले में न्याय मिले।"
उन्होंने कहा, "राज्य में कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभाल रहे मंत्री को कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में सम्मन किए जाने से संवैधानिक कठिनाई पैदा हो गई है।" कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि उनकी पार्टी शाह के मंत्री पद पर बने रहने का फैसला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर छोड़ना चाहती है।
उन्होंने कहा कि जब से गुजरात में भाजपा की सरकार बनी है, खासकर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, तब से फर्जी मुठभेड़ों के कई मामले सामने आए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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