वस्तु पर 6-10 और सेवाओं पर 8 प्रतिशत जीएसटी : प्रणब
सरकार ने अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के अंतर्गत जीएसटी लागू करने के पहले साल दोहरी दर संरचना का प्रस्ताव दिया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत वस्तुओं पर जीएसटी की न्यूनतम दर छह प्रतिशत और उच्चतम दर 10 प्रतिशत रखी जा सकती है। वहीं सेवाओं पर कर की दर आठ प्रतिशत रखने का प्रस्ताव है।
मुखर्जी ने कहा कि कर की इस दोहरी दर संरचना को बाद में एकल बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा, "हम जीएसटी के अंतर्गत वस्तुओं पर दोहरी कर संरचना के प्रस्ताव पर सहमत हुए हैं। जीएसटी लागू होने के पहले साल (2011) सरकार ने सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) में वस्तुओं पर छह प्रतिशत और मुख्य दर 10 प्रतिशत की दोहरी कर संरचना का प्रस्ताव रखा है।"
प्रदेशों के वित्त मंत्रियों के अधिकारिक समूह की बैठक में मुखर्जी ने कहा, "सेवाओं पर कर की दर आठ प्रतिशत रहेगी।"
देश के उद्योग समूह केंद्र और राज्य के करों में एकरूपता की मांग करते रहे हैं। कई मामलों में कर की दर 30 प्रतिशत तक होती है इससे बड़े पैमाने पर कर चोरी होती है।
केंद्र और राज्यों के बीच प्रारंभिक सहमति बनने पर अब प्रदेश वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) और सीजीएसटी की दर एक समान रह सकती है।
जीएसटी के लागू होने के बाद दूसरे साल में एसजीएसटी और सीजीएसटी की मुख्य उच्च दर को घटाकर नौ प्रतिशत किया जाएगा और निम्न दर को छह प्रतिशत पर ही रखा जाएगा।
इसके बाद तीसरे साल में प्रदेश और केंद्र दोनों के जीएसटी के अंतर्गत वस्तु एवं सेवाओं पर कर की सभी दरों को आठ प्रतिशत किया जाएगा।
मुखर्जी ने कहा, "चरणबद्ध तरीके से हम सीजीएसटी और एसजीएसटी के अंतर्गत वस्तुओं और सेवाओं पर करों की दर में समानता लाएंगे।"
मौजूदा कर संरचना में करों से छूट पाने वाली 99 वस्तुओं को सीजीएसटी और एसजीएसटी में भी कर दायरे से बाहर रखा जाएगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि यदि राज्यों को राजस्व में किसी तरह का नुकसान होता है तो 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप इसका भुगतान किया जाएगा।
कर संग्रह का नया तंत्र लागू होने के बाद केंद्र और राज्यों के उत्पाद कर, वैट और सेवा कर जैसे सभी कर जीएसटी में शामिल कर लिए जाएंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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