सिख विरोधी दंगा : फुल्का की कानूनी लड़ाई छोड़ने की पेशकश
54 वर्षीय वकील ने कहा कि वह दंगा पीड़ितों के मुकदमे 'वैकल्पिक व्यवस्था' होने तक लड़ते रहेंगे।
अकाल तख्त साहिब को लिखे पत्र में फुल्का ने कहा है, "दंगों से संबंधित मुकदमे लड़ते रहना मेरे लिए अब संभव नहीं है।"
उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि मेरे फैसले का इन मुकदमों पर विपरीत असर पड़ेगा, लेकिन मेरे हाथ बंधे हुए हैं। वैकल्पिक व्यवस्था होने के बाद ही मेरा निर्णय लागू होगा, ताकि समुदाय के हित को क्षति न पहुंचे।"
उन्होंने हालांकि महसूस किया, "वैकल्पिक व्यवस्था में काफी विलंब होना मुकदमों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है।" उन्होंने धार्मिक निकाय को विश्वास दिलाया, "वैकल्पिक व्यवस्था होने तक मैं ये मुकदमे लड़ता रहूंगा।"
उल्लेखनीय है कि फुल्का ने यह फैसला दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना एवं उनके भाई हरविंदर द्वारा आरोप लगाए जाने के बाद लिया है। कमेटी की 17 जुलाई को हुई बैठक में आरोप लगाया गया था कि फुल्का ने डीएसजीएमसी से 1.09 करोड़ रुपये लिए हैं।
फुल्का ने आईएएनएस को बताया, "मुझे इससे गहरा धक्का लगा है। मैं खुद को अपमानित महसूस कर रहा हूं। यह मेरी ईमानदारी और नि:स्वार्थ सेवाओं पर हमला है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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