नेपाल में प्रहसन बना प्रधानमंत्री पद का चुनाव
इसके कारण दोपहर 11 बजे होने वाला मतदान टाल दिया गया और अन्य पार्टियों के बीच बातचीत का दौर जारी है।
माओवादियों ने नेपाल की एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी-मार्क्सवादी लेनिनवादी (यूएमएल) को दिए गए समर्थन को वापस लेने की घोषणा कर दी।
माओवादी पार्टी ने यूएमएल के उम्मीदवार झालनाथ खनल को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी और उन्होंने शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने संबंधी पूर्व गुरिल्लाओं की शर्तो से सहमति जताई थी।
बहरहाल चुनाव शुरू होने से केवल कुछ समय पहले ही माओवादी पार्टी के उपाध्यक्ष बाबूराम भट्टराई ने कहा कि पार्टी ने खनल का समर्थन नहीं करने और पार्टी प्रमुख पुष्प कमल दहाल 'प्रचंड' को उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है।
इस गतिरोध को बढ़ाते हुए तराई की चार क्षेत्रीय पार्टियों ने कहा कि वे किसी भी उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगी। इन पार्टियों के कुल 82 सांसद हैं। किसी भी उम्मीदवार को प्रधानमंत्री बनने के लिए 300 वोट हासिल करने जरूरी हैं।
उधर यूएमएल ने कहा कि 601 सदस्यीय संसद में 400 सांसदों का समर्थन सुनिश्चित नहीं हुआ तो खनल उम्मीदवारी वापस ले लेंगे। खनल की उम्मीदवारी वापस होने की स्थिति में पार्टी ने व्हिप जारी कर अपने सांसदों को बाकी दोनों में से किसी भी उम्मीदवार को वोट नहीं देने का निर्देश दिया है।
अब प्रधानमंत्री पद की लड़ाई केवल प्रचंड और नेपाली कांग्रेस के उम्मीदवार के बीच होने के बावजूद करीब 200 सांसदों वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के मतदान में हिस्सा नहीं लेने से किसी भी उम्मीदवार को आवश्यक बहुमत मिलने की संभावना नहीं है।
अब सदन के अध्यक्ष चुनाव की तारीख को बढ़ाकर एक नई तिथि तय कर सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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