छत्तीसगढ़ ने लौह अयस्क के निर्यात पर प्रतिबंध की मांग की
मुख्यमंत्री रमन सिंह ने आईएएनएस से कहा, "पिछले छह महीनों से मैं लौह अयस्क के निर्यात पर रोक लगाने की मांग दोहरा रहा हूं। देश के सीमित संसाधनों को बाहर भेजने का निर्णय विवेकपूर्ण नहीं है।"
सिंह ने यह मांग केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में गुरुवार को होने जा रही 10 सदस्यीय मंत्रीमंडलीय समूह की बैठक में नए खदान और खनिज विकास एवं नियमन विधेयक पर विचार से पहले की है।
लौह अयस्क के अवैध उत्खनन खासकर कर्नाटक में इस तरह की खबरों के बाद पिछले कई महीनों से इसके निर्यात पर प्रतिबंध की मांग की जा रही है।
भारत दुनिया में लौह अयस्क का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। देश के कुल उत्पादन का लगभग 50 प्रतिशत निर्यात किया जाता है। जिसमें से ज्यादातर निर्यात चीन को किया जाता है। वर्ष 2009-10 में देश में 22.6 करोड़ टन लौह अयस्क का उत्पादन किया गया था।
जानकारों का मानना है कि देश से 10 करोड़ टन लौह अयस्क का प्रतिवर्ष निर्यात और ज्यादा समय तक जारी नहीं रखा जा सकता।
सिंह ने कहा, "लौह अयस्क का निर्यात देश के प्रति अपराध है इससे देश के सीमित संसाधन प्रतिदिन घट रहे हैं। इसका उपयोग घरेलू इस्पात उद्योग को मजबूत बनाने में किया जाना चाहिए।"
छत्तीसगढ़ में देश की सबसे बेहतर गुणवत्ता का लौह अयस्क मिलता है। यहां के बस्तर इलाके में सरकारी क्षेत्र की कंपनी 1968 से खनन कार्य कर रही है।
एनएमडीसी के अध्यक्ष और कार्यकारी निदेशक राणा सोम ने भी निर्यात कम करने के लिए राष्ट्रीय लौह अयस्क नीति लागू करने पर जोर दिया।
इस्पात मंत्री वीरभद्र सिंह ने पिछले सप्ताह प्रतिबंध लगाए जाने की मंशा जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि देश में कीमती धातुओं का संरक्षण होना चाहिए और इनसे बने उत्पादों का ही निर्यात किया जाना चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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