अपनों की तलाश में रोते-बिलखते परिजन
कोलकाता। पं.बंगाल ने पूरे भारत को हिला कर रख दिया है। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में रविवार देर रात हुए रेल हादसे के बाद लोग अपनों की खैरियत जानने के लिए एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक संपर्क साधते रहे लेकिन ज्यादातर को मायूसी हाथ लगी। कंचन डे नाम के एक शख्स ने बताया, "मेरी सास माला रॉय और पत्नी कूचबिहार से लौट रहे थे। वे उत्तरबंगा एक्सप्रेस में थे। परंतु मैं नहीं जानता कि वे जीवित हैं भी या नहीं।"
मौत का सफर
अपनी बेटी के बारे में जानने के लिए परेशान फूलमती दत्ता ने कहा, "रविवार रात मैंने अपनी बेटी और दामाद से फोन पर बात की। वे वनांचल एक्सप्रेस में थे। मैं पहले हावड़ा स्टेशन गई थी। अब मैं सियालदह स्टेशन आई हूं लेकिन उनके बारे में कोई खबर नहीं है।"प्रशांत महापात्र भी एक ऐसे शख्स हैं जो अपने बेटे की खैरियत जानने के लिए परेशान दिखे। उन्होंने कहा, "मेरा बेटा रांची जा रहा था। वह आसनसोल से रेलगाड़ी में सवार हुआ था। परंतु मेरे पास उसकी कोई जानकारी नहीं है। मैं जब भी फोन करता हूं, उसका मोबाइल बंद मिलता है।"
गौरतलब है कि बीरभूम जिले के सैंथिया रेलवे स्टेशन पर रविवार देर रात उत्तरबंगा एक्सप्रेस ने भागलपुर-रांची वनांचल एक्सप्रेस को पीछे से टक्कर मार दी। इस घटना में 60 लोग मारे गए और 150 अधिक घायल हो गए।













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