विकास दर 8.5 प्रतिशत से अधिक होगी : प्रणब
मुखर्जी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन को रेखांकित किया और कहा, "यदि यूरोपीय क्षेत्र का संकट कुछ देशों तक सीमित रह गया, तब तो हमारे ऊपर इसका कुछ खास असर नहीं होगा। लेकिन यदि अन्य देशों तक इसका विस्तार हुआ तो मैं खुद नहीं जानता कि क्या कुछ घट सकता है।"
यूरोप, भारत का सबसे बड़ा विदेशी बाजार है और देश के निर्यात का पांचवां हिस्सा यूरोप को जाता है।
ग्रीस द्वारा एक बड़े ऋण घोटाले के जरिए पैदा हुए वित्तीय संकट ने पुर्तगाल और हंगरी जैसे देशों को अपनी चपेट में लेने का खतरा पैदा कर दिया है। सप्ताहांत में मीडिया में आई रिपोर्टो में कहा गया है कि हंगरी को मदद के मुद्दे पर हंगरी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और यूरोपीय संघ के बीच वार्ता टूट गई है।
इसके साथ ही यूरोप और अमेरिका में विनिर्माण और खपत पर हाल में आई एक निराशाजनक रिपोर्ट ने सुधार में काफी हद तक गिरावट का नया भय पैदा कर दिया है।
यहां एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा कि आईएमएफ जैसे बहुपक्षीय संस्थाओं ने मजबूत वित्तीय व्यवस्था, खासतौर से बैंकिंग उद्योग और निजी निवेश के आधार पर मौजूदा वित्त वर्ष में भारत के लिए 9.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है।
मुखर्जी ने कहा, "यद्यपि आईएमएफ ने वित्त वर्ष 2010-11 के लिए हाल में सकल घरेलू उत्पाद के 9.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, लेकिन मैं थोड़ा अनुदार हूं और मुझे भरोसा है कि मौजूदा वित्त वर्ष की वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत से अधिक रहेगी और 2011-12 तक हमारा लक्ष्य वृद्धि दर को दो अंकों तक पहुंचाने का होगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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