नक्कालों से बचाएगा 'ननक्लोनेबल' तकनीक

ब्रजेन्द्र नाथ सिंह

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। नकली दवाइयां, नकली नोट, नकली पहचान पत्र और न जाने क्या-क्या नकली चीजें बाजारों में उपलब्ध हैं जिनसे रोजमर्रा की जिंदगी में हमारा सरोकार होता है। ये नकली चीजें ग्राहकों से लेकर निर्माता कपंनियां और सरकारों तक की परेशानी का सबब बनी हुई हैं।

अब इनमें से किसी को भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि देश में अब एक ऐसी तकनीक विकसित ही नहीं बल्कि क्रियान्वित हो गई है जो उत्पादों से लेकर नोटों और पहचान पत्रों तक की विश्वसनीयता पल भर में साबित कर देगी।

दरअसल, नैनो टेक्नॉलॉजी के माध्यम से 'ननक्लोनेबल' नाम का एक ऐसा पहचान प्रबंधन तंत्र (आइडेंटिटी मैनेजमेंट सिस्टम) विकसित किया गया है जिससे नकली उत्पादों पर रोक लगाई जा सकती है। ऐसे तकनीक से लैस यदि किसी उत्पाद का नकली उत्पाद तैयार कर उसे बाजार में चलाने की कोशिश की गई और वह किसी जागरूक ग्राहक के हाथ लग जाए तो वह पल भर में पकड़ा भी जाएगा।

'ननक्लोनेबल' तकनीक माइक्रो और नैनो अवयवों से बने एक विशिष्ट फिंगरप्रिंट पर आधारित है। इस फिंगरप्रिंट से लेबल या टैग बना होता है। किसी उत्पाद पर अंकित होने के साथ-साथ यह एक केंद्रीकृत सुरक्षित सर्वर प्लेटफार्म से भी जुड़ा होता है। जो मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से उत्पाद की विश्वसनीयता से संबंधित संदेश प्रेषित करता है।

फर्ज कीजिए आपने किसी दवा के दुकान से कोई दवाई ली। अब आप यदि यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि वह दवा असली है या नकली तो आप इसका आसानी से पता कर सकते हैं बशर्ते कि दवा निर्माता कंपनी ने 'ननक्लोनेबल' तकनीक अपने उत्पाद में क्रियान्वित कर रखा हो।

इसका आसान तरीका यह है कि दवा पर अंकित लेबल या टैग को बिलकेयर द्वारा निर्मित एक रोबुस्ट रीडर पर स्वैप किया जाए। आप जैसे ही उसे स्वैप करेंगे, संबंधित जानकारी मोबाइल फोन या इंटरनेट नेटवर्क के जरिए आपके पास आ जाएगाी कि उत्पाद असली है या नकली।

इसे संभव कर दिखाया है शोध व तकनीक के क्षेत्र की जानीमानी कंपनी बिलकेयर टेक्न ॉलॉजीस ने। सुरक्षा की दृष्टि से यह कितना उपयोगी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कंपनी दिल्ली पुलिस के 70,000 जवानों का पहचान पत्र तैयार करने जा रही है। इन पहचान पत्रों से यह तक पता लग जाएगा कि फलां वक्त फलां कर्मचारी ड्यूटी पर तैनात था या नहीं। रैनबेक्सी, पानेसिया बायोटेक जैसी कई दवा उत्पाद कंपिनयां और कुछ एग्रोकेमिकल क्षेत्र की उत्पादक कंपनियों ने भी नक्कालों से बचने के लिए कंपनी से समझौता किया है।

सोमवार को यहां आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लोक सूचना, संसाधन और नवाचार संबंधी मामलों के सलाहकार सैम पित्रोदा और उनके प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार आर. चिदंबरम की उपस्थिति में इस तकनीक का अवलोकन किया।

इस अवसर पर पित्रोदा ने कहा कि यह बहुत ही नई, रोचक व रोमांचित करने वाली तकनीक है। यह बड़े काम की चीज है। पांच साल पहले तक यह कल्पना नहीं की जा सकती थी लेकिन बिलकेयर ने इसे संभव कर दिखाया है।

कंपनी के चैयरमेन और प्रबंध निदेशक मोहन भंडारी ने कहा, "इस तकनीक के उपयोग के बारे में ग्राहकों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। हमारा उद्देश्य है कि कंपनी में निर्मित उत्पाद वैसे ही रूप में ग्राहक तक पहुंचाना सुनिश्चित करना है। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह अहम है।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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