अदृश्य अंतरिक्ष पिण्डों के आविष्कार से नासा उत्साहित
लंदन, 19 जुलाई (आईएएनएस)। नासा के एक नवीनतम दूरबीन ने अदृश्य अंतरिक्ष पिण्डों को मात्र छह महीने में ढूढ़ निकाला है। इस दूरबीन का नाम, वाइड-फील्ड इन्फ्रारेड सर्वे एक्प्लोरर (डब्ल्यूआईएसई) है।
इस आविष्कार से नासा के वैज्ञानिक खासा उत्साहित हैं। 32 करोड़ डॉलर के इस आकाशमापी अंतरिक्षयान ने पहली बार ऐसे हजारों अंतरिक्ष पिण्डों की पहचान की है, जिन्हें इसके पहले कभी नहीं देखा जा सका था। इन पिण्डों में तारे, क्षुद्रग्रह, धूल के बादल, धूमकेतु और एक नई आकाश गंगा भी शामिल है।
समाचार पत्र 'टेलीग्राफ ' ने खबर दी है कि नासा की ओर से कहा गया है कि रात के समय पूरे आसमान की इन्फ्रा-रेड लाइट में डेढ़ गुना फोटोग्राफी की तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इस टेलीस्कोप ने 25,000 से अधिक नए क्षुद्रग्रहों का पता लगाया है। यह अभियान पिछले वर्ष के आखिर में शुरू हुआ था।
खगोल विज्ञानियों ने कहा कि इनमें से 100 क्षुद्रग्रहों को पृथ्वी के करीब माना गया है या फिर 480 लाख किलोमीटर के भीतर। विशेषज्ञों ने कहा है कि इनमें से किसी भी क्षुद्रग्रह से पृथ्वी को कोई वास्तविक खतरा नहीं है।
दूरबीन ने 15 नए धूमकेतुओं और सैकड़ों संभावित भूरे बौनों, या विफल तारों का भी पता लगाया है। इसने 20 बौनों के अस्तित्व की पुष्टि भी की है। इसमें से कुछ सबसे ठंडे माने जाते हैं।
डब्ल्यूआईएसई ने उस पिण्ड का भी पता लगाया है, जिसे नासा के वैज्ञानिक अत्यंत चमकदार आकाश गंगा मानते हैं। यह आकाश गंगा अन्य आकाश गंगाओं से 10 अरब प्रकाश वर्ष से भी अधिक दूरी पर स्थित है।
इन निष्कर्षो से नासा पूरे जोश में है। इनमें से अधिकांश पिण्ड इसके पहले अन्य तमाम दूरबीनों की पकड़ से बाहर रहे हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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