संघ ने की गोवंदाचार्य, उमा और संजय जोशी की वापसी की वकालत
नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने एक तरफ जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में वापसी पर सवाल उठाया है, वहीं गोविंदाचार्य, उमा भारती और संजय जोशी की वापसी की वकालत की है।
संघ के दैनिक मुखपत्र 'तरुण भारत' में प्रकाशित एक लेख में यह बात कही गई है। इसे लिखा है संघ के पूर्व प्रचारक एवं थिंक टैंकों में शुमार एम.जी. वैद्य ने। इस लेख में कहा गया है कि हाल ही में जसवंत सिंह को पुन: पार्टी में प्रवेश दिया गया है। पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनका स्वागत किया और कहा कि 'पुरानी बातें बीते दिन की बात हो चुकी हैं।' लेकिन सवाल यह है कि सिर्फ जसवंत सिंह की ही वापसी क्यों? गोविंदाचार्य, उमा भारती और संजय जोशी की वापसी क्यों नहीं?
लेख में आगे कहा गया है, "जसवंत यदि सदा के लिए पार्टी से बाहर रहते तो भी पार्टी का कुछ भी नहीं बिगड़ता, लेकिन गोविंदाचार्य सहित इन तीनों के पार्टी में पुन: प्रवेश से भाजपा की ताकत बढ़ जाती। पार्टी से निकाले जाने के हर व्यक्ति के पीछे अलग-अलग कारण रहे होंगे, मैं उन कारणों का जिक्र नहीं करूंगा, लेकिन संजय जोशी एक गंदी कारस्तानी की बलि चढ़े। इसका उल्लेख आवश्यक है।"
लेख के मुताबिक इन तीनों नेताओं की भाजपा में वापसी गडकरी की हिम्मत की कसौटी है। "गडकरी ने जिस उत्साह और आदर के साथ जसवंत सिंह को पार्टी में लिया, उससे अधिक आदरपूर्वक इन तीनों को पार्टी में प्रवेश देना आवश्यक है। यह उनकी हिम्मत की कसौटी भी है।"
भाजपा को नसीहत देते हुए वैद्य ने अपने लेख में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव प्रकाश करात की तारीफ करते हुए कहा, "माकपा में करात अपनी नैतिक शक्ति के महत्व के कारण न तो संसद और न ही किसी राज्य विधानसभा के सदस्य हैं। ऐसी पद्धति होनी चाहिए। इसके लिए जरूरत पड़े तो पार्टी के संविधान में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। संगठन में व्यक्ति की नैतिक शक्ति प्रभावी होती है।"
ये बातें कहकर वैद्य ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी पर भी निशाना साधा है। उन्होंने ेइस लेख के माध्यम से यह भी स्पष्ट करना चाहा है कि पार्टी का अध्यक्ष संसदीय दल के नेता से श्रेष्ठ होता है।
पार्टी में व्याप्त आपसी गुटबाजी पर नसीहत देते हुए उन्होंने कहा, "जहां सब लोग स्वयं को नेता और विद्वान समझते हैं, जहां सबको बड़ा बनने की हवस होती है, ऐसे कुल का नाश होता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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